कोविड प्रबंधन को लेकर दिल्ली सरकार पर उठे सवाल, जागो पार्टी ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

2021-07-17T18:31:30.047

नई दिल्लीः गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के कोविड सेंटर में कथित फर्जी डाक्टरों के हाथों मरीजों की जिंदगी ख़तरे में डालने के आरोप में जागो पार्टी ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन, दिल्ली कमेटी अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा और महासचिव हरमीत सिंह कालका के खिलाफ थाना नार्थ एवेन्यू में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई हैं।

जागो पार्टी के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि नकली और गैर प्रमाणिक मेडिकल स्टाफ, नकली एंबुलेंस और गलत दवा की वजह से 14 मई 2021 को सेंटर में भर्ती हुए मरीज अमरजीत सिंह की मृत्यु हुई थी। ऑक्सीजन लेवल 92 के साथ अमरजीत सिंह को उनके पुत्र भूपिंदर सिंह ने सेंटर में दाखिल कराया था और रात को 10 बजे अपने परिवार से बातचीत में उन्होंने अपनी तबीयत ठीक बताई थी। लेकिन 4 बजे रात को मरीज के पुत्र को किसी एंबुलेंस ड्राइवर का फोन आता है कि आपके पिता की तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें  लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल भेजा जा रहा है, आप वहां आ जाए। 

परिवार के लोग जब अस्पताल पहुंचते हैं तो पता चलता है कि मरीज की मृत्यु हो गई है। लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल की तरफ से जारी डेथ सर्टिफिकेट में लिखा है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज की मृत्यु हो चुकी थी।

जीके ने बताया कि यह दावा मरीज के पुत्र ने हमें सौंपे कागजात के साथ एक वीडियो में किया है। साथ ही संदेह भी जताया है कि उनके पिता की मौत गलत दवाई से हुई हो सकती है।जीके ने कहा कि पीले रंग की स्कूल बसों को एंबुलेंस बता कर लोगों की भावनाओं से इन्होंने खिलवाड़ किया हैं, क्योंकि स्कूल बसों की अधिकतम रफ़्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा स्पीड गवर्नर  के कारण तय होती है, जबकि एंबुलेंस की अधिकतम रफ़्तार का कोई नियम नहीं है। इसलिए हमारा आरोप है कि दिल्ली कमेटी ने स्कूल बस को एंबुलेंस के रूप में चलाकर मरीज को मरने के लिए छोड़ दिया था।

जीके ने दिल्ली कमेटी की प्रबंधकी सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर स्कूल बस का एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल करते समय कोई हादसा हो जाता तो आर.सी. की शर्तों के उल्लंघन पर बीमा कंपनी दावे को ठुकराने का हक रखती है। लेकिन सिरसा-कालका अपनी वाहवाही के चक्कर में गुरु तेग बहादर साहिब के नाम पर संगतों को गुमराह करने से भी बाज नहीं आए। इसलिए हमने सभी सबूतों के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराई है और मुझे पूरा विश्वास है कि गुरु तेग बहादर साहिब जी के नाम पर आम लोगों से छलावा करने वाले इन अपराधियों को इनके मुकाम तक दिल्ली पुलिस जरुर पहुंचाएंगी।

जीके ने बताया कि दिल्ली कमेटी एक्ट की धारा 36 के अनुसार सिरसा-कालका लोक सेवकों की परिधि में आते हैं और इन्होंने एक अन्य लोक सेवक सत्येंद्र जैन के साथ मिलकर लोगों के साथ विश्वासघात किया हैं। इससे पहले हम इसी कोविड सेंटर के नकली डाक्टरों का खुलासा कर चुके हैं। जबकि मंत्री और कमेटी की तरफ से सेंटर शुरू होने से पहले मीडिया के सामने दावा किया गया था कि इस सेंटर को लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के 50 डाक्टर चलाएंगे, लेकिन आपदा को अवसर में बदलते हुए इन्होंने इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन नाम की एनजीओ को बिना किसी मेडिकल महारत की जांच किए मरीजों के इलाज का ठेका दे दिया। जिस बारे पता चला है कि एनजीओ को 1.5 करोड़ रुपए इस बाबत दिल्ली सरकार से मिलने है। 

एनजीओ ने गैर एमबीबीएस डाक्टरों व प्रमाणिक मेडिकल स्टाफ का इंतजाम किए बिना सभी को मूर्ख बना दिया। इसलिए थाने में दी अपनी शिकायत में मैंने तीनों आरोपियों के खिलाफ साजिश, धोखाधड़ी,  लोक सेवकों द्वारा आपराधिक विश्वासघात, लोगों की सुरक्षा ख़तरे में डालने, महामारी एक्ट 2005 सहित अन्य कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। जिसमें  धारा 120 B, 420, 409, 336 की 34, 35 और महामारी एक्ट की धारा 52, 53 व 55 शामिल है। 

जीके ने कहा कि एक तरफ कमेटी ने कोविड सेंटर के नाम पर देश-विदेश से करोड़ों रुपए और जीवन उपयोगी मेडिकल उपकरण सेवा के नाम पर प्राप्त किए हैं, पर दूसरी तरफ 25-30 दिन तक इस सेंटर में काम करने वाले स्टाफ को दिल्ली कमेटी, दिल्ली सरकार और एनजीओ ने वेतन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं और आज भी स्टाफ कमेटी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठा हैं।


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Content Writer

Yaspal

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