पलामू फैमिली डेथ केस: एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत, स्वास्थ्य विभाग को शक, ड्रॉप्सी बीमारी से...
punjabkesari.in Wednesday, Jul 08, 2026 - 07:11 PM (IST)
नेशनल डेस्क: झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में कथित रहस्यमयी बीमारी से एक परिवार के छठे सदस्य एवं घर की महिला मुखिया लाखो देवी पति कुलदीप मेहता की भी मौत हो गई। रांची रिम्स में उसका इलाज चल रहा था। इसी क्रम में मंगलवार रात उसने दम तोड़ दिया। रिम्स में लाखो का बेटा एवं इस परिवार का सातवां सदस्य सुनील कुमार मेहता अभी भी इलाजरत है।
मृतकों की बेसरा की रिपोर्ट आनी बाकी
अब इस परिवार में दो बेटे और एक पोता रह गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी की मौत ड्रॉप्सी बीमारी से हुई है। स्वास्थ्य विभाग इसी बीमारी का इलाज कर पीड़ितो को ठीक करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि मृतकों के बेसरा की रिपोटर् आनी बाकी है। आर्जीमोन मिला सरसों तेल का इस्तेमाल करने के कारण ड्रॉप्सी बीमारी हुई है। यहां
बता दें कि 2011 के बाद भारत में ड्रॉप्सी का यह पहला मामला निकलकर सामने आया है।
तीनों शव का पोस्टमाटर्म कराया गया
सिक्का गांव में इस रहस्यमय बीमारी से परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की सबसे पहले 19 जून को मौत हुई थी। 20 जून को उनकी बेटी बबिता कुमारी की मौत हुई थी। 26 जून को बेटी इंदु कुमारी की मौत हुई थी। तीनों शव का पोस्टमाटर्म मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल में हुआ था, जबकि कुलदीप मेहता की बहु स्वेता का 28 जून और बेटा नकुल मेहता की रांची रिम्स में मौत हुई थी।
मां की मौत, बेटे का इलाज जारी
7 जुलाई की रात पत्नी लाखो देवी की मौत हो गई। सभी के शरीर में सूजन था और बाद में उनकी मौत हुई। एक बेटे सुनील कुमार का इलाज चल रहा है। एक बेटे अनुज कुमार के मजदूरी के सिलसिले में घर से बाहर रहने के कारण वह पूरी तरह स्वस्थ है। कुलदीप का पोता और सुनील का पुत्र नानी घर रहने के कारण वह भी ठीक है। पाटन के चिकित्सा पदाधिकारी श्रवण कुमार ने बुधवार सुबह 10 बजे बताया कि लाखो देवी की मौत की सूचना मिली है।
स्वास्थ्य विभाग ने गांव का कराया सर्वे
रिम्स में उसकी मौत हुई है। पूरे गांव के हालात पर स्वास्थ्य विभाग नजर रखे बनाए हुए है। इस गांव में सर्वे भी किया गया है, लेकिन इस परिवार के अलावा कोई दूसरा पीड़ित नहीं मिला है। हालांकि गांव में एक बार फिर से सर्वे किया जाएगा। आर्जीमोन एक कांटेदार खर-पतवार है जो पलामू के इलाके में बड़े पैमाने पर पाया जाता है। इसे स्थानीय भाषा में कटैला और पीला धतूरा भी कहा जाता है।
खाद्य सामग्री की भी कराई गई जांच
सरसों तेल की खेती के दौरान फसल काटकर खेत में रखने पर आर्जीमोन के दाने मिक्स हो गए और तेल बनाकर इस्तेमाल किया गया। रांची फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी से आई जांच रिपोटर् से इसका खुलासा हुआ था। सरसों तेल के अलावा जांच के लिए कई तरह की खाद्य सामग्री भेजी गई थी लेकिन उनमें कुछ नहीं मिला था।
