NEET टॉपर शोएब आफताब नहीं गए थे दो साल से अपने घर, पिता से किया था ये वादा

2020-10-17T11:50:36.107

नई दिल्ली: चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा नीट के नतीजे शुक्रवार रात को घोषित कर दिए गए। परीक्षा में ओडिशा के शोएब आफ्ताब ने पहला जबकि दिल्ली की अकांक्षा सिंह ने दूसरा स्थान हासिल किया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। वहीं मीडिया से बातचीत के दौरान शोएब आफ्ताब ने बताया कि उन्होंने अपने पिता से वादा किया था कि जब तक नीट क्लियर नहीं कर लेते वह घर नहीं आएंगे।

 शोएब के परिवार में नहीं हैं कोई डॉक्टर 
उन्होंने अपनी सफलता का सारा श्रेय माता पिता को देते हुए कहा कि इन्होंने ही मुझे डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखने के लिए प्रेरित किया और मेरे साथ खड़े रहे। शोएब ने बताया कि कोरोना संकट में कई बार नीट की परीक्षा स्थगित होने से काफी दवाब महसूस करता था लेकिन कभी हौंसला नहीं छोड़ा। शोएब के पिता का कंस्ट्रक्शन बिजनेस है और मां हाउस वाइफ हैं। शोएब ने कोटा के एलन करियर इंस्टीट्यूट से अपनी नीट की कोचिंग ली। शोएब के परिवार में कोई डॉक्टर नहीं था, ऐसे में उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पहली रैंक आ जाएगी। उन्होंने लॉकडाउन में घर न जाने का फैसला किया। अप्रैल 2018 में तैयारी के लिए कोटा आ गए थे, जिसके बाद से वह अभी तक घर नहीं गए हैं। 

कोविड-19 महामारी की वजह से इस साल नीट परीक्षा दो बार टाली गई
आपको बतां दे कि सबसे अधिक त्रिपुरा के उम्मीदवारों (88,889) ने परीक्षा में सफलता हासिल की जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के प्रतिभागी रहे। महाराष्ट्र के 79,974 प्रतिभागियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। राष्ट्रीय अर्हता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) कोविड-19 महामारी के बीच कड़े एहतियाती उपायों के साथ 13 सितंबर को कराई गई थी। इस साल से देश के 13 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जवाहर लाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुडुचेरी की एमबीबीएस पाठ्यक्रम की सीटों पर भी नीट के जरिये प्रवेश होगा। यह बदलाव पिछले साल संसद से पारित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम-2019 के तहत किया गया है। इस बार नीट परीक्षा 11 भाषाओं- अंग्रेजी, हिंदी, असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड, मराठी, उडिया, तमिल, तेलुगु और उर्दू् में कराई गई। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक 77 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अंग्रेजी भाषा में परीक्षा दी जबकि हिंदी भाषा में 12 प्रतिशत और अन्य भाषाओं में 11 प्रतिशत विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। कोविड-19 महामारी की वजह से इस साल नीट परीक्षा दो बार टाली गई और सरकार ने अकादमिक सत्र को शून्य होने से बचाने के लिए एक वर्ग के विरोध के बावजूद परीक्षा कराने का फैसला किया। 


Edited By

Anil dev

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