देश में 10 साल के भीतर कम हुए करीब 1 लाख सरकारी स्कूल, संसद में उठा शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा; कॉलेज और यूनिवर्सिटी...
punjabkesari.in Tuesday, Jul 28, 2026 - 09:34 PM (IST)
नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र में देश के सरकारी स्कूलों की घटती संख्या को लेकर गरमागरम बहस छिड़ गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर पिछले कुछ वर्षों में एक लाख से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद करने का गंभीर आरोप लगाया है। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्कूलों के संचालन, विलय या उन्हें बंद करने का अंतिम निर्णय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
4 साल में 17 हजार स्कूल कम हुए
सरकार द्वारा जारी UDISE+ आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021-22 में देश भर में कुल 10,22,386 सरकारी स्कूल थे, जो 2025-26 तक घटकर 10,05,245 रह गए हैं। इसका मतलब है कि बीते 4 सालों में ही करीब 17,000 स्कूलों की कमी आई है। यदि पिछले एक दशक के आंकड़ों को देखें, तो सरकारी स्कूलों की संख्या में लगभग 1 लाख की भारी कमी आई है।
यूपी-एमपी में सबसे ज्यादा असर
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्कूलों के विलय और पुनर्गठन की प्रक्रिया सबसे अधिक चर्चा में रही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में 2025-26 के दौरान 1,77,103 सरकारी स्कूल दर्ज किए गए, जो किसी भी राज्य में सबसे अधिक हैं, लेकिन इससे पहले के वर्षों की तुलना में यहां स्कूलों की संख्या में बड़ी कमी आई है।
केंद्र की सफाई: शिक्षा नीति और विलय
इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 स्कूलों के एकीकरण (मर्जर) की अनुमति देती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया तभी अपनाई जाती है जब इससे छात्रों की शिक्षा तक पहुंच पर कोई बुरा असर न पड़े। मंत्रालय के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को बुनियादी ढांचे और छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है, जबकि शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेदारी राज्यों की होती है।
यूनिवर्सिटियों की संख्या में 77% की बढ़ोतरी
एक तरफ जहां प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की संख्या घटी है, वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों के मामले में देश ने लंबी छलांग लगाई है। AISHE 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, साल 2013-14 में देश में केवल 723 विश्वविद्यालय थे, जो 2023-24 तक बढ़कर 1,289 हो गए हैं। यानी 10 सालों में विश्वविद्यालयों की संख्या में 77 फीसदी की वृद्धि हुई है।
प्राइवेट यूनिवर्सिटीज का दबदबा
उच्च शिक्षा के विस्तार में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे बड़ी रही है। पिछले 10 वर्षों में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की संख्या 219 से बढ़कर 540 हो गई है, जो लगभग 149 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। वहीं, सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या में भी 45 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जो 504 से बढ़कर 733 तक पहुंच गई है।
