ये कैसा विकास...और जेल बनाने की क्या जरूरत है? गरीब कैदियों के बारे में कहकर भावुक हुईं राष्ट्रपति मूर्मू

punjabkesari.in Monday, Nov 28, 2022 - 12:22 PM (IST)

नेशनल डेस्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को देश और देशवासियों के लिए समान सोच रखने की आवश्यकता है। उच्चतम न्यायालय द्वारा यहां संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुर्मू ने मामूली अपराधों के लिए वर्षों से जेलों में बंद गरीब लोगों की मदद करके वहां कैदियों की संख्या कम करने का सुझाव दिया। 

उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि जेलों में कैदियों की भीड़ बढ़ती जा रही है और जेलों की स्थापना की जरूरत है? क्या हम विकास की ओर बढ़ रहे हैं? तो फिर और जेल बनाने की क्या जरूरत है? हमें उनकी संख्या कम करने की जरूरत है।’’ मुर्मू ने कहा कि जेलों में बंद इन गरीब लोगों के लिए अब कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आपको इन लोगों के लिए कुछ करने की जरूरत है। जानने की कोशिश कीजिए कि आखिर कौन हैं ये?


राष्ट्रपति ने भावुक अंदाज में कहा कि जेल में बंद उन लोगों के बारे में सोचें, जो कि थप्पड़ मारने के जुर्म में जेल में कई सालों से बंद हैं। उनको न तो अपने अधिकार पता हैं, न ही संविधान की प्रस्तावना, न ही मौलिक अधिकार या मौलिक कर्तव्य। उनके बारे में कोई नहीं सोच रहा है। उनके घर वालों में उन्हें छुड़ाने की हिम्मत नहीं रहती, क्योंकि मुकदमा लड़ने में ही उनके घर के बर्तन तक बिक जाते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि जिंदगी खत्म करने वाले तो बाहर घूमते हैं, लेकिन आम आदमी मामूली जुर्म में वर्षों जेल में पड़ा रहता है। कौन हैं ये लोग, उनकी जानकारी लीजिए, इनके बारे में पता कीजिए।

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैं छोटे गांव से आई हूं, हम गांव के लोग तीन ही लोगों को भगवान मानते हैं। जिनमें गुरु, डॉक्टर और वकील शामिल हैं। गुरु ज्ञान देकर, डॉक्टर जीवन देकर और वकील न्याय दिलाकर भगवान की भूमिका में होते हैं। उन्होंने अपने पहले विधायक कार्यकाल में विधानसभा की कमेटी के अपने अनुभव साझा किए। अपनी उम्मीदों के सच न होने का अफसोस जताया, फिर राज्यपाल होने के दौरान के भी अनुभव साझा किए। 


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Content Writer

Anil dev

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