सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद सुर्खियों में आया भारतीय- कनाडाई गिरोह

punjabkesari.in Wednesday, Jun 29, 2022 - 11:54 AM (IST)

नेशनल डेस्क: पंजाब में सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर इसकी जिम्मेदारी कनाडा में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ द्वारा लेने के बाद भारतीय-कनाडाई गिरोह एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। खासकर  कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया के के एबॉट्सफोर्ड इलाके में "द रफियंस" नाम से एक गिरोह एकाएक चर्चा में आ गया है।  

करीब तीन साल हले  इस अंतर्राष्ट्रीय गिरोह की स्थापना पंजाबी मूल के लोगों ने ही की है। जहां तक गोल्डी बराड़ की बात है तो वह 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा की पहुंचा था। भारत और विशेष रूप से पंजाब के छात्रों का प्रवेश 2015 से लगातार बढ़ रहा है। आप्रवासन शरणार्थी और नागरिकता कनाडा (आईआरसीसी) के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2021 में भारत के छात्रों को 156,171 अध्ययन की अनुमति दी गई थी, जो बीते साल की संख्या से लगभग दोगुना है। कनाडा के विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या इस साल 200,000 के आंकड़े को पार करने की संभावना है।

गिरोह के सभी सदस्य अंतरराष्ट्रीय छात्र
वैंकूवर पुलिस के एक अनुभवी पुलिस अधिकारी काल दोसांझ का कहना है कि "द रफियंस" के नाम से तीन साल पुराना गिरोह अपनी तरह का पहला गिरोह है और इसके सभी सदस्य अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं। पुलिस अधिकारी दोसांझ किड्स प्ले फाउंडेशन के सीईओ भी हैं। वे युवाओं को अपराध से दूर रखने का काम करते है। उनका कहना है कि वित्तीय तनाव और आय के अतिरिक्त स्रोत की आवश्यकता उनको मौजूदा गिरोहों की ले जाती है। इस प्रकार वे शिक्षा से दूर होते जाते है। दोसांझ कहते है कि संख्यात्मक रूप से उनमें से केवल 3 प्रतिशत ही अपराध के शिकार हैं लेकिन प्रवृत्ति परेशान करने वाली है।

सबसे बड़े ड्रग रैकेट में शामिल थे पंजाबी
कनाडा और पंजाब में अपराधियों के बीच संबंध पहली बार जून 2021 में विश्व स्तर पर जांच के दायरे में आए जब टोरंटो पुलिस ने ब्रैम्पटन में एक वैश्विक ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया था। मामले में गिरफ्तार किए गए 28 पुरुषों में ज्यादातर भारतीय मूल के थे। टोरंटो सन अखबार ने इसे स्थानीय पुलिस द्वारा इतिहास में सबसे बड़ी नशीली दवाओं की बरामदगी बताया था। पुलिस ने 61 मिलियन डॉलर की 1,000 किलोग्राम ड्रग्स, 48 आग्नेयास्त्र, 1 मिलियन डॉलर नकद बरामद किया था।

ड्रग की तस्करी के लिए कुरियर का इस्तेमाल
पंजाब के एक पूर्व डीजीपी का कहना है कि भारत से कनाडा में ड्रग की तस्करी पिछले 10-15 साल से हो रही है। यह एक घातक कॉकटेल है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत अंतरराष्ट्रीय ड्रग रूट का हिस्सा हैं। शुरुआत में यहां के तस्कर ड्रग्स की तस्करी के लिए जानी-मानी कूरियर कंपनियों का इस्तेमाल करते थे। करोड़ों रुपये के जगदीश भोला ड्रग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा वांछित कनाडा स्थित रंजीत सिंह औजला उर्फ दारा मुथड़ा की 9 जून को ब्रिटिश कोलंबिया में हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई, थी, जो कोलंबिया कबड्डी फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष थे।

गिरोहों की संख्या करीब 900
वोल्फपैक, रेड स्कॉर्पियन, संयुक्त राष्ट्र और ब्रदर्स कीपर्स जैसे गिरोह इंडो-कैनेडियन वैंकूवर पर हावी होते जा रहे हैं। उदाहरण के लिए द ब्रदर्स कीपर्स की स्थापना गविंदर सिंह ग्रेवाल ने की थी। जिनकी दिसंबर 2017 में 30 साल की उम्र में हत्या कर दी गई थी। रेड स्कॉर्पियन्स के पास सहयोगी के रूप में बिबो-कांग समूह  समित ब्रदर्स और गैरी कांग द्वारा स्थापित किया गया था।  ब्रिटिश कोलंबिया गवर्नेंस की संगठित अपराध एजेंसी की वेबसाइट ने पिछले पांच वर्षों में ऐसे गिरोहों की संख्या 600 और 900  के बीच दर्ज की है। गिरोह के बीच की लड़ाई अक्सर भारत-कनाडाई लोगों पर भारी पड़ती हैं।

200 से ज्यादा लोगों की हत्या
मई के पहले दो हफ्तों में लक्षित हत्याओं में एक पुलिस अधिकारी सहित चार भारतीय-कनाडाई मारे गए। बाद में सीएफएसईयू ने 11 लोगों की तस्वीरें जारी की गई उनमें से सात भारतीय-कनाडाई थे जिनकी जड़ें पंजाब में थीं। मेट्रो वैंकूवर क्राइम स्टॉपर्स के कार्यकारी निदेशक लिंडा एननिस ने कहा कि ब्रिटिश कोलंबिया में 2021 में 123 गिरोहों से संबंधित गोलीबारी की घटना सामने आई। कनाडा में दक्षिण एशियाई गिरोहों पर अपनी थीसिस में एक शोधकर्ता मंजीत पाबला का कहना है कि पिछले तीन दशकों में सामाजिक बहिष्कार और समावेश के विरोधाभासी उद्देश्यों के लिए सामूहिक हिंसा में लगभग 200 दक्षिण एशियाई पुरुष मारे गए हैं। उनमें से कई की जड़ें पंजाब में थीं।


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Content Writer

Anil dev

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