ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया खुलासा: आम लोगों के मुकाबले ज्यादा होती है राजनेताओं की उम्र

punjabkesari.in Wednesday, Jun 29, 2022 - 03:21 PM (IST)

नेशनल डेस्क: दुनिया को प्रभावित करने वाले नेताओं से जुड़ी एक खास बात, वैज्ञानिकों को पता चली है। एक नई रिसर्च से साबित हुआ है कि नेता आम लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा लंबा जीवन जीते हैं। इससे दुनिया भर के कुलीन और आम लोगों के बीच की गहरी असमानता का भी पता चलता है। शोध के मुताबिक समय के साथ ये अंतर बढ़ता जा रहा है। 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में अधिकांश देशों के नेताओं की मृत्यु दर सामान्य आबादी की तरह ही थी। लेकिन 20वीं शताब्दी के दौरान मृत्यु दर का अंतर सभी देशों में व्यापक रूप से बढ़ गया।

57 हजार से ज्यादा नेताओं का डाटा लिया
यह शोध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने किया है और इसे यूरोपियन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, स्विटजरलैंड, यूके और अमेरिका सहित 11 देशों के 57,500 से ज्यादा नेताओं के डाटा पर शोध किया और इस नतीजे पर पहुंचे। टीम ने 1816 से 2017 के बीच, सभी देशों को राजनेताओं के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया था।

महिलाओं की औसत आयु ज्यादा
इनमें महिला नेताओं की संख्या 3 प्रतिशत से 21 प्रतिशत के बीच है। शोध में यह भी पता चला कि महिलाएं, पुरुषों की तुलना में औसतन ज्यादा समय तक जीवित रहती हैं। वर्तमान में, स्विट्जरलैंड में आम लोगों और नेताओं के बीच जीवन प्रत्याशा  का अंतर 3 साल है और अमेरिका में 7 साल साल है। जबकि इटली में एक आम इंसान की मौत की संभावना उसी उम्र और लिंग के नेताओं के मुकाबले 2.2 गुना ज्यादा होती है, जबकि न्यूजीलैंड में ये 1.2 गुना ज्यादा है।

नेताओं में दिल की बीमारी का जोखिम ज्यादा
ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से ऐसा हो सकता है। उदाहरण के लिए, 20वीं शताब्दी के शुरुआती 50 सालों में कुलीन और पेशेवर लोगों में धूम्रपान की दर ज्यादा थी। हालांकि, 1950 के दशक से दरों में गिरावट आ रही है। शायद अध्ययन में इस बात का अनुमान भी लगाया गया है कि आम जनता की तुलना में नेताओं के बीच धूम्रपान की दरों में तेजी से गिरावट आई है। ये भी माना जा रहा है कि इसके पीछे दिल के स्वास्थ्य का भी थोड़ा बहुत लेना-देना हो सकता है। राजनेताओं में दिल की बीमारी का जोखिम, आम लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। लेकिन 1960 के दशक में एंटी हाइपरटेंसिव ड्रग्स व्यापक रूप से उपलब्ध होने लगीं, जिससे इलाज आसान हो गया है। 


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Anil dev

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