कालभैरव जयन्ती: परिवार सहित करें ये काम, लौट आएंगी रुठी हुईं खुशियां

2019-11-19T09:02:38.29

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भूतभावन भगवान भैरव को शिव का अवतार माना गया है अत: वह शिव स्वरूप ही हैं और उनके साकार रूप हैं। भैरव सम्पूर्णत: परात्पर शंकर ही हैं। भैरव की महत्ता असंदिग्ध है, वह आपत्ति-विपत्ति विनाशक एवं मनोकामना पूर्ति के देव हैं। वैसे तो संसार में भैरव के कई रूप सुख्यात हैं, परंतु उनमें दो अत्यंत प्रसिद्ध हैं : 1. काल भैरव और 2 बटुक भैरव-आनंद भैरव। काल के समान भीषण होने के कारण इन्हें काल भैरव कहा गया, वस्तुत: ये कालों के काल हैं और सभी प्रकार के संकट से रक्षा करने में ये सक्षम हैं। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काल भैरवाष्टक का पाठ अत्यंत लाभकारी होता है। परिवार सहित काल भैरव के मंदिर जाएं, आरती करें और पीले रंग का झंडा चढ़ाएं। इसके अलावा कुछ उपाय कर लेने से आपके घर में सकारात्मकता आएगी और घर-परिवार से रुठी हुईं खुशियां पुन: लौट आएंगी। राशि अनुसार करें ये उपाय-

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मेष- दो रंग वाले कुत्ते को तेल लगाकर रोटी खिलाएं।

वृष- उड़द की दाल के पकौड़े किसी भी रंग के कुत्ते को खिलाएं।

मिथुन- काले रंग के कुत्ते को जलेबी खिलाएं, भैरव मंदिर में सिंदूर चढ़ाएं।

कर्क- सफेद रंग के कुत्ते को पुए खिलाएं, भैरव मंदिर में तेल चढ़ाएं।

सिंह- भूरे रंग के कुत्ते को अमरती खिलाएं और भैरव मंदिर में नारियल चढ़ाएं।

कन्या- सवा सौ ग्राम काले तिल को सवा मीटर काले कपड़े में लपेटकर भैरव मंदिर में चढ़ाएं और तेल का दीपदान करें।

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तुला- किसी भी एक रंग के कुत्ते को जलेबी खिलाएं।

वृश्चिक- किसी कोढ़ी या भिखारी को मदिरा दान करें और भैरव बाबा को भी मदिरा का भोग लगाएं।

धनु- उड़द की दाल के पापड़ गरीबों में बांट दें।

मकर- भैरव मं‍दिर में चंदन, गुलाब अथवा गुगल की खुशबू वाली अगरबत्तियां जलाएं।

कुंभ- भैरव मं‍दिर में नींबू चढ़ाएं।

मीन- सवा सौ ग्राम काले उड़द भैरव मं‍दिर में चढ़ाएं।

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Niyati Bhandari

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