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चीनी मीडिया ने भारत को दिखाई आंख, जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान को बताया राफेल से ज्यादा खतरनाक

2020-06-24T13:07:35.313

नेशनल डेस्कः पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी मेें हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद से ही भारत-चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि मंगलवार को दोनों देशों की सेनाएं टकराव वाली जगह से पीछे हटने को तैयार हैं। पिछले दिनों से चले आ रहे तनाव के कारण दोनों देशों की सेनाओं की ताकत भी आंकी जा रही है कि अगर युद्ध जैसे हालात बने तो किस देश की सेना भारी पड़ेगी।

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चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' का दावा है कि चीन के सामने भारत तो क्या रूस, फ्रांस और अमेरिका के हथियार भी मुकाबला नहीं कर सकते।  'ग्लोबल टाइम्स' ने दावा किया कि चीन सेना के पास PCL-181 और PLZ-05 स्व-चालित हॉवित्जर, Z-10 अटैक हेलीकॉप्टर, और टाइप 15 और टाइप 99A टैंक जैसे  क्षमता, मारक क्षमता और गतिशीलता के मामले में कहीं बेहतर हथियार हैं जिनका कोई मुकाबला नहीं है। इतना ही नहीं चीन की वायुसेना सबसे ज्यादा ताकतवर है। ग्लोबल टाइम्स' का कहना है कि चीन एयरफोर्स के पास ऐसे जेट हैं जो जिनके सामने राफेल भी कहीं नहीं टिकता।

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 जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान VS राफेल
चीन के लिए जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान उतारना बहुत बड़ी सफलता मानी जाती है।  ग्लोबल टाइम्स' का दावा है कि भारत के पास अभी तक ऐसा कोई स्टील्थ विमान नहीं है जोकि दुश्मनों के रडार को तोड़ते हुए हमला कर सके।  दरअसल यह लड़ाकू विमान चीन की चेंगदू एयरोस्पेस कार्पोरेशन द्वारा चीनी वायु सेना के लिए किया गया है। राफेल भले ही एफ-16 पर भारी पड़ रहा हो लेकिन चीन के जे-20 श्रेणी के विमानों की चुनौती बड़ी है। चीन के जे-20 विमानों की कॉम्बैट रेडियस 3400 किलोमीटर है जिसके आगे राफेल नहीं टिकता है। चीन आने वाले सालों में जे-20ए विमानों को अपनी वायुसेना में शामिल कर रहा है। इसे देखते हुए भारतीय वायुसेना को भी अपनी क्षमताओं में इजाफा करना होगा। 

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जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान की खासियत

  • चेंगदू जे-20 लड़ाकू विमान लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस है जो बेहद तेज से चलता है और रडार की पकड़ में भी नहीं आता है।
  • चीन का यह विमान पीएल-15 और पीएल-21 मिसाइलों से लैस है जिनकी रेंज क्रमश: 300 और 400 किलोमीटर है। 
  • यह 18 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है जबकि राफेल और एफ-16 इस मामले में काफी पीछे हैं। 

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राफेल जेट
भारत को फ्रांस से मिलने वाले राफेल का रडार सिस्टम काफी तगड़ा है जिसके आगे F-16 भी नहीं टिकता। राफेल का रडार सिस्टम 100 किलोमीटर के दायरे में एक बार में एकसाथ 40 टारगेट की पहचान कर सकता है जबकि पाकिस्‍तान के एफ-16 का रडार सिस्टम केवल 84 किलोमीटर के दायरे में केवल 20 टारगेट की ही पहचान करने में सक्षम है। हालांकि राफेल चीन के जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान से पीछे है क्योंकि इसकी रडार काफी है। 

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राफेल की खूबियां

  • राफेल महज एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। यह 17 हजार किलोग्राम ईंधन क्षमता से लैस है। यह हर तरह के मौसम में एक साथ कई काम करने में सक्षम है।
  • राफेल का ऑन बोर्ड रडार और सेंसर काफी दूर से दुश्मन के लड़ाकू विमानों को डिटेक्ट कर सकता है। 
  •  तकनीक के मामले में ह्यूमन मशीन इंटरफेस भी राफेल को अन्य विमानों से ज्यादा सक्षम बनाती है। 
  • राफेल में लगे विभिन्‍न सेंसरों से पायलट को फैसला लेने कुछ माइक्रोसेकेंड का समय लगता है।
  • राफेल मीटिअर और स्‍काल्‍प (meteor and scalp missile) मिसाइलों के साथ उड़ान भर सकता है। 
  • मीटिअर मिसाइलें 150 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर हवा में गति कर रहे टारगेट पर भी सटीक निशाना लगाने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें जेट से लेकर छोटे मानव रहित विमानों के साथ-साथ क्रूज मिसाइलों को भी ध्‍वस्‍त कर सकती हैं।
  •  यह 2,223 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से 24,500 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम है।
  •  यही नहीं 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान भी भर सकता है। यह 18,288 मिनट प्रति मिनट की रफ्तार से ऊंचाई पर पहुंचता है।
  • राफेल परमाणु मिसाइल डिलीवर करने में सक्षम, दुश्मन के इलाके में जाए बगैर भी वार करने में अचूक है।
  • हथियारों का सबसे सुविधाजनक इस्तेमाल, निचले अक्षांशों में भी हवा से हवा में मार कर सकता है।
  • इसकी मारक क्षमता हवा से हवा में 150 किलोमीटर, हवा से जमीन तक 300 किलोमीटर है।
  • राफेल की विजिबिलिटी 360 डिग्री यानी ऊपर-नीचे, अगल-बगल यानी हर तरफ निगरानी रखने में सक्षम है

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भले ही चीन अपनी हेकड़ी दिखा रहा हो लेकिन भारत के लिए अच्‍छी बात यह है कि उसे मीटियोर मिसाइल मिल रही है जिसे BVRAAM (Beyond Visual Range Air to Air Missile) की अगली पीढ़ी की मिसाइल भी कहा जाता है और यह एशिया में किसी दूसरे देश के पास नहीं है। 


Seema Sharma

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