बाल उगाने की पेटेंटेड भारतीय तकनीक से मिलेगी केमोथेरेपी ले रहे कैंसर रोगियों को मदद

2020-03-13T18:28:34.97

अहमदाबादः देश के जाने माने प्लास्टिक और कास्मेटिक सर्जन डॉ. देबराज शोम ने शुक्रवार को कहा कि वह अपनी इजाद की हुई बाल उगाने की अनूठी तकनीक क्यूआर 678, जिसे भारत और अमेरिका में पेटेंट भी मिला हुआ है, को कीमोथेरेपी ले रहे कैंसर रोगियों की सहायता के लिए भी उपयोग करने के बारे में विस्तृत शोध और अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही संबंधित शोध पत्र प्रकाशित भी किया जाएगा। 

शोम, जो द एस्थेटिक क्लिनिक्स नाम के चेहरे की प्लास्टिक तथा सौंदर्य वर्धन सर्जरी केंद्रों की श्रृंखला के निदेशक भी हैं, ने पत्रकारों को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक हेयर ट्रांसप्लांट यानी बाल प्रत्यारोपण जैसी महंगी और पीड़ादायक नहीं है और यह कोई सर्जरी भी नहीं है। इसमें पौधों से प्राप्त की गई दवा के इंजेक्शन को बालों की जड़ों तक पहुंचाना भर होता है। यह आठ माह तक हर माह एक बार करना होता है। इसका अमेरिका में 2017 में और भारत में पिछले साल पेटेंट हुआ था। इसका गंजेपन और अन्य कारणों से बाल झड़ने के इलाज के मामले में बहुत ही उत्साजनक परिणाम मिलने के बाद उन्होंने कैंसरग्रस्त लोगों की केमोथेरेपी के दौरान झड़ने वाले बाल को उगाने या बचाने में मदद के लिए आजमाने की बात सोची।  

उन्होंने कहा कि असल में यह दवा कैंसर के इलाज के लिए ही ढूंढी जा रही थी पर यह संयोगवश बाल के मामले में कारगर हो गई। अब इसके जरिए कैंसर रोगियों के लिए एक बहुत ही सकारात्मक इस्तेमाल करने का प्रयोग चल रहा है। इलाज के दौरान बाल झड़ने से कैंसर रोगियों पर बुरा मनौवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है जो पूरी उपचार प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। अगर उनके बाल झड़ने से रोका जा सके तो उनके अंदर सकरात्मकता बढ़ने से इलाज में भी मदद मिल सकती है। इसलिए हमने इस दिशा में काम शुरू किया है। अब तक 100 कैंसर मरीजों पर इसको आजमाया गया है और इसके उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। जल्द ही इस बारे में एक औपचारिक शोध पत्र प्रकाशित किया जाएगा।    


shukdev

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