सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, चीन के साथ जारी विवाद पर दी जानकारी

2020-09-16T22:05:08.94

नई दिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विभिन्न राजनीतिक दलों के आग्रह पर पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति में एकतरफा बदलाव करने की कोशिशों एवं इस कारण सैन्य तनाव के समूचे घटनाक्रम को लेकर आज शाम उन पाटिर्यों के नेताओं से चर्चा की। सूत्रों ने बताया कि सिंह ने लोकसभा में मंगलवार को दिये गये बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के सवालों को सुना और उन्हें समुचित जानकारी दी। इस बैठक में एक अंग्रेजी अखबार में एक चीनी कंपनी द्वारा भारत में बड़े पैमाने पर जासूसी किये जाने संबंधी रिपोटरं के बारे में भी पूछा गया।

सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को रक्षा मंत्री राज्यसभा में बयान देंगे। सिंह ने कल लोकसभा में बयान देकर भारत एवं चीन के बीच सैन्य तनाव पर सारी स्थिति स्पष्ट की थी जिस पर कांग्रेस के नेताओं ने सवाल पूछने का प्रयास किया था। अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सवाल पूछने की अनुमति नहीं दिए जाने पर कुछ विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया था।

राहुल गांधी ने सरकार को घेरा
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी चीन के साथ भारत के संबंधों को लेकर मोदी सरकार को लगातार घेरने की कोशिश कर रहे हैं। वह रोजाना ट्विटर के माध्यम से सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह चीन विवाद के बारे में देश को गुमराह कर रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं। रक्षा मंत्री सिंह ने लोकसभा में अपने बयान में चीन को सख्त संदेश देते हुए कहा था कि पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों की यथास्थिति में एकतरफा बदलाव की उसकी कोशिश किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। भारत इस मामले का समाधान संवाद से करना चाहता है लेकिन अपनी संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता की रक्षा करने की खातिर हर परिस्थिति के लिए भी तैयार है।

उन्होंने अपने वक्तव्य में भारत चीन सीमा विवाद की पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया है और कहा कि चीन भारत की लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर लद्दाख में अनधिकृत कब्जा किए हुए है। इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित सीमा करार के तहत, पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के भाग से 5180 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन के हवाले कर दी थी। सिंह ने कहा कि हम अपने वीर जवानों के साथ कदम-से-कदम मिलाकर खड़े हैं जो अपनी जान की परवाह किए बगैर हुए हिमालय की दुर्गम चोटियों पर विषम परिस्थितियों के बावजूद देश की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने 15 जून को गलवान घाटी में सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्नल संतोष बाबू और 19 अन्य सैनिकों श्रद्धांजलि भी अर्पित की थी।

 


Yaspal

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