GHMC Results: दक्षिण भारत में बढ़ता भाजपा का जनाधार

2020-12-04T22:49:36.377

नेशनल डेस्क (यशपाल सिंह): हैदराबाद निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने दक्षिण भारत राज्यों में नए अध्याय की नींव रख दी है। दक्षिण भारत में भाजपा का बढ़ता जनाधार दूसरे दलों के लिए एक चिंता का सबब बन सकता है। तेलंगाना में हैदराबाद नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 49 सीटों पर जीत दर्ज की है जो 2016 में मिली जीत से बहुत बड़ी जीत है। वहीं, तेलंगाना राष्ट्र समिति को बड़ा झटका लगा है। टीआरएस को 56 सीटों पर तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईए को 43 सीटों पर जीत मिली है। निकाय चुनाव में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा है, जिसे 150 सीटों में से केवल 2 सीटों पर ही जीत मिली है।

निकाय चुनाव में भाजपा के सभी बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। भाजपा की ओर से पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व भाजपा अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रोड शो भी किए। जबकि भारतीय जनता युवा मोर्चा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने भी जमकर प्रचार प्रसार किया। पार्टी ने भूपेंद्र यादव को चुनाव का प्रभारी बनाया गया था, उन्होंने प्रचार से लेकर टिकट वितरण तक की रणनीति तय की।
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हैदराबाद नगर निकाय (GHCM) की जीत ने भाजपा को दक्षिण भारत राज्यों में जीत के रास्ते खोल दिए हैं। अगले साल तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा फायदा मिल सकता है खासकर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में, जहां भाजपा ने सत्ताधारी पार्टी टीएमसी को हराने के लिए अपने सारी ताकत झौंक दी है। तमिलनाडु में भाजपा और एआईएडीएमके मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं।

उपचुनाव में शानदार प्रदर्शन
तेलंगाना में हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और टीआरएस का गढ़ रहे दुब्बाक सीट पर जीत दर्ज की। उपचुनाव में भाजपा को 38.47 फीसदी वोट मिले। टीआरएस को 37.82 फीसदी, कांग्रेस को 13.48 फीसदी वोट मिले, जबकि अन्य के खाते में सिर्फ 9.5 फीसदी वोट ही आए।

2016 के निकाय चुनाव में फीका रहा प्रदर्शन
2016 के निकाय चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहद फीका रहा और 150 में से केवल 4 सीटें ही अपने खाते में ला सकी। सत्ताधारी पार्टी टीआरएस ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 99 सीटों पर जीत दर्ज की थी। एआईएमआईएम ने 44 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस 2 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों को जिताने में सफल रही। लेकिन इस बार सबकुछ बदला, बदला सा नजर आया। जो पार्टी पिछले चुनाव में 4 सीटों पर सिमटकर रह गई थी, उसने 49 सीटों पर कब्जा कर दक्षिण भारत की राजनीति मे नया अध्याय लिख दिया।
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2018 विधानसभा चुनाव में सिर्फ 1 सीट पर मिली जीत
2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 118 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन सिर्फ 2 सीट पर जीत मिली थी। इस चुनाव में पार्टी को 14,50,456 (7.4 प्रतिशत) वोट मिले थे। हालांकि आंध्र प्रदेश के विभाजन से पहले भाजपा को 2013 के विधानसभा चुनाव में 5 सीटें मिलीं थीं।

2019 लोकसभा चुनाव में 4 सीटें जीतीं
2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 17 में से 4 सीटों पर जीत दर्ज की और दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी। इस चुनाव में पार्टी को 36,26,173 (23.53 प्रतिशत) वोट मिले, जो अब तक का भाजपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा और दूसरे नंबर पर काबिज कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया।
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हालांकि सीट के लिहाज से यह नंबर कम जरूर हो सकते हैं, लेकिन अगर भाजपा नेताओं की मानें तो उनके लिए इस जीत ने दक्षिणी राज्यों में के लिए जीत के दरवाजे खोल दिए हैं। अब तक देखा गया है कि हिंदी पट्टी राज्यों में भाजपा का अब तक शानदार प्रदर्शन रहा है, चाहे वह लोकसभा चुनाव हो या फिर राज्यसभा चुनाव। पूर्वोत्तर समेत उत्तर भारत के 12 राज्यों राज्यों में भाजपा की अपने दम पर सरकार हैं तो वहीं, 6 राज्यों में सरकार में सहयोगी है।

दक्षिण भारत के राज्यों की बात करें तो भाजपा की केवल एक राज्य (कर्नाटक) में सरकार है। भाजपा दक्षिण के राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाने पर काम कर रही है और आने वाले दिनों में उसे कितनी सफलता मिलती है। यह जनता तय करेगी। लेकिन भाजपा के इस प्रदर्शन ने पार्टी नेताओं के मनोबल को ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और राष्ट्रीय नेताओं से लेकर स्थानीय नेता यह दावा कर रहे हैं कि तेलंगाना में अगली सरकार भाजपा की होगी।  


Yaspal

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