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Exclusive: इस साल GDP में 0% से अधिक वृद्धि की आशा नहीं, अकेला कृषि क्षेत्र उम्मीद की किरण

2020-05-21T12:27:29.027

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है। रोजाना हजारों की संख्या में मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए का वित्तीय राहत पैकेज भी जारी किया है। पूर्व वित्त मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदम्बरम का मानना है कि राहत पैकेज से ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि राहत की सीमा जी.डी.पी. के मात्र 1' से अधिक नहीं है।  देश के मौजूदा आर्थिक हालात को लेकर पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स/ जगबाणी/हिंद समाचार ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के साथ बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

सवाल: भारत कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित है। कई और देश भी इस बुरे दौर से गुजर रहे हैं। आप इस बारे में क्या कहना चाहते हैं?
जवाब: भारत अपवाद नहीं है। उम्मीद थी कि दुनिया के दूसरे देशों की तरह कोरोना वायरस भारत में भी फैल जाएगा। विदेश से लौटने वाले भारतीय शायद यह नहीं जानते थे कि वे संक्रमित हैं। उन्होंने ही देश में कोरोना वायरस फैलाया। इसने सरकार को भी हैरत में डाल दिया। अब इस महामारी के बारे में इससे ज्यादा मैं क्या कह सकता हूं।

सवाल: लॉकडाउन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को किस तरह प्रभावित किया है?
जवाब:
पहले से धीमी हो रही अर्थव्यवस्था को कोविड-19 के चलते पैदा हो रही मंदी नकारात्मक वृद्धि की ओर धकेल सकती है। किसी भी कीमत पर इस साल उद्योग व सेवा क्षेत्रों में जी.डी.पी. में जीरो प्रतिशत से अधिक वृद्धि की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। अकेला कृषि क्षेत्र उम्मीद की किरण है।

सवाल: भारत सरकार की तरफ से घोषित 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का क्या असर पड़ेगा?
जवाब:
तथाकथित 20 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक राहत पैकेज एक छोटे राजकोषीय पैकेज का हिस्सा है, जो कुछ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था में जान फूंकने में इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।

सवाल: आर्थिक पैकेज के ऐलान के बाद शेयर बाजार में काफी हलचल देखने को मिली, आपके हिसाब से अब क्या स्थिति है?
जवाब:
स्टॉक मार्कीट ऊपर-नीचे होते रहते हैं। शेयर बाजार के दो सूचकांक सैंसैक्स व निफ्टी पूरी अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर नहीं पेश करते हैं। वास्तव में भारतीय अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का शेयर बाजार के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। यह इससे प्रभावित नहीं होता है। देश के आर्थिक हालात पहले से ही खराब थे और दिन-प्रति-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।

सवाल: पैकेज में एम.एस.एम.ई. पर विशेष जोर दिया गया है। किसानों और प्रवासी मजदूरों को इस पैकेज में क्या मिला है?
जवाब:
कुंठित होने की कोई सीमा नहीं होती है। प्रवासी मजदूर, जो नैशनल फूड सिक्योरिटी स्कीम के तहत नहीं आते हैं को अनाज से ज्यादा कुछ नहीं मिलेगा, वो भी दो महीने के लिए। किसानों को लंबे-चौड़े व्याख्यान और वायदों के सिवाय कुछ नहीं मिला। किसी भी सैक्टर को वित्तीय राहत नहीं मिली।

सवाल: अगर कोरोना महामारी की बात करें तो भारत के हालात विश्व के बाकी देशों की तुलना में कितने अलग हैं?
जवाब:
भारत अभी भी महामारी को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है। नए मामलों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। जमीन समतल होने का अभी कोई संकेत नहीं मिला है या फिर कमी के अब तक कोई संकेत नहीं मिले हैं। सौभाग्य से हमारी मृत्यु दर 3.3 प्रतिशत के कम स्तर पर है।

सवाल: डॉक्टरों तथा स्वास्थ्य कर्मियों पर समाज के एक खास तबके द्वारा किए गए हमले को आप कैसे देखते हैं, क्या ये महज लापरवाही है या फिर इसके दूसरे भी कारण हैं?
जवाब:
कई जगह डॉक्टरों पर पीड़ित परिवारों ने हमला किया जिसकी निंदा की जानी चाहिए। दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए। मुझे नहीं मालूम कि कौन सा संक्रमित व्यक्ति इलाज से भागा। मैंने पढ़ा है कि कुछ मामलों में संदिग्धों ने केवल इस वजह से आत्महत्या कर ली, क्योंकि उन्हें संदेह था कि संक्रमित हो सकते हैं। उनकी काऊंसङ्क्षलग की जानी चाहिए थी और सही इलाज किया जाना चाहिए था।

सवाल: सरकार ने 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है, लेकिन आपकी पार्टी इससे खुश नहीं है। आपको पैकेज में खामियां ही खामियां दिखाई दे रही हैं। आपका इसके बारे में क्या कहना है?
जवाब:
हमने तथाकथित 20 लाख करोड़ के पैकेज पर विस्तृत विश्लेषण रखा है। राजकोषीय प्रोत्साहन के उपाय कितने हैं ? 30 लाख 42 हजार 230 करोड़ रुपये के व्यय बजट संख्या से अधिक और अतिरिक्त व्यय कितना है ? पहले से ही बजट खर्च का कितना हिस्सा है ? कृपया आर्थिक और राजकोषीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया विश्लेषण देखें और खुद की अतार्किक प्रशंसा  से पहले अपना होमवर्क करें।

सवाल: एक तरफ तो लोगों से घर में रहने के लिए कहा जा रहा है, दूसरी ओर शराब की दुकानें खोल दी गई हैं। आपकी पार्टी का इस बारे में क्या कहना है?
जवाब:
हम लॉकडाऊन में शराब की दुकानें खोले जाने का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन राज्यों को राजस्व घाटा हो रहा है, उनके पास संसाधनों की कमी है। इसलिए हर राज्य अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर फैसले ले रहा है।

सवाल: राजस्थान में आपकी पार्टी की सरकार है। उसने तो लॉकडाऊन में ढील देते ही आबकारी शुल्क बढ़ा दिया। पंजाब में भी आपकी पार्टी सरकार में है। उसने भी शराब की दुकानें खोलने की मांग की थी। आपका क्या कहना है?
जवाब:
केंद्र राज्यों को उदार अनुदान देने पर सहमत हो जाता तो यह स्थिति नहीं होती। राज्यों को राज्य चलाने, वेतन का भुगतान करने और कोविड-19 से लड़ाई लडऩे के लिए संसाधनों की आवश्यकता है, जबकि केंद्र राज्यों को अनुदान देने में कंजूसी बरत रहा है।

सवाल: सरकार कह रही है कि उसने तो पूरी पुस्तक ही पेश कर दी है, लेकिन आप ही उसे पढ़ नहीं पा रहे हैं। आपको मौका दिया जाता तो ड्रीम पैकेज क्या होता?
जवाब:
कौन सी किताब? क्या केवल कांग्रेस ही पुस्तक नहीं पढ़ सकती है? विश्लेषकों, अर्थशास्त्रियों, विशेषज्ञों, थिंक टैंक, अंतर्राष्ट्रीय एजैंसियों, अजीम प्रेम जी, वेणु श्रीनिवासन और अन्य के बारे क्या कहेंगे? हमारा पैकेज पैसा लगाने के लिए प्रधानता के साथ 10 लाख करोड़ के अतिरिक्त खर्च के लिए होता है। आबादी के निचले हिस्से (करीब 13 करोड़ परिवार) के हाथों में नकदी होना, हर परिवार को मुफ्त अनाज तीन-चार माह या ज्यादा समय तक के लिए होना चाहिए था। एम.एस.एम.ई. को वेतन सहायता कोष जरूरी था।

सवाल: आप मानते हैं कि यह राहत पैकेज नहीं शब्दों और आंकड़ों की बाजीगरी है। आप इसे कैसे समझाएंगे?
जवाब:
यह एक राहत पैकेज है, लेकिन राहत की सीमा जी.डी.पी. के 1 प्रतिशत से अधिक नहीं है। बाकी मौजूदा योजनाओं, बजट आवंटन व मध्यम से दीर्घकालिक प्रस्तावित सुधारों की री-पैकेजिंग है।

सवाल: सरकार का कहना है कि विपक्ष का काम केवल आलोचना करना है। आपका क्या कहना है?
जवाब:
लोकतंत्र में रचनात्मक आलोचना करना विपक्ष का कर्तव्य होता है। इसके अलावा सरकार की विफलताओं को उजागर करना, वैकल्पिक नीतियों को इंगित करना और सरकार को जमीन पर रखना भी उसके कर्तव्यों में शामिल है।

सवाल: वित्त मंत्री ने रेहड़ी-पटरीवालों के लिए 50 लाख की अपील की है। आपका इस बारे में क्या कहना है?
जवाब:
केवल मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाने के समान है। कौन सा बैंक इन स्ट्रीट वैंडर्स को ऋण देगा, जो क्रैडिट योग्य होने के नाते बैंक के मानदंडों के तहत योग्य नहीं होंगे। स्ट्रीट वैंडर्स डेली कमाई पर जिंदा रहते हैं, क्योंकि बैंक उन्हें ऋण देने से इन्कार कर देते हैं।

सवाल: आत्मनिर्भर भारत अभियान के बारे में आपका क्या कहना है? भारत सरकार को किन क्षेत्रों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब:
हर देश जहां तक संभव हो सके, खुद को आत्मनिर्भर बनाना चाहता है। यह कोई नया विचार नहीं है। आत्मनिर्भरता को प्रतिस्पर्धा, दक्षता और नवीनतम तकनीक के साथ हाथ मिलाना चाहिए। हमें वैश्विक बाजार का हिस्सा बनने में सक्षम होना चाहिए।


Chandan

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