Farmers Protest: किसान विरोध प्रदर्शन का अब तक का लेखा-जोखा

2020-12-03T21:53:07.033

नेशनल डेस्कः (यशपाल सिंह) नए कृषि कानूनों को लेकर देश के किसानों ने दिल्ली के चारों तरफ डेरा डाल दिया है। पंजाब से आए किसान हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर जमे हुए हैं तो उत्तर प्रदेश के किसान गाजीपुर बॉर्डर पर डटे हुए हैं। यूपी के किसानों ने यूपी-दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर को बंद कर दिया है। नए कृषि कानून के खिलाफ पंजाब से शुरू हुई किसानों की लड़ाई अब देशभर में पहुंच गई है। किसान लगातार कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। कृषि कानून पास होने के बाद पंजाब के किसानों ने पहले 2 महीने तक राज्य में प्रदर्शन किया, लेकिन जब सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो किसानों ने 6 महीने का राशन-पानी लेकर दिल्ली की ओर कूच कर दिया, हालांकि इस यात्रा में उनको बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें हरियाणा सरकार ने वाटर कैनन का इस्तेमाल कर किसानों को रोकने की कोशिश की लेकिन किसानों के हौसले इतने बुलंद थे कि कोई वॉटर कैनन या फिर सड़क का गड्डा उनके कदमों को दिल्ली की ओर कूच करने से नहीं रोक सका। किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ ‘गोली खाएंगे या जीतकर जाएंगे’ का नारा बुलंद किया है।

किसानों के बुलंद हौसले, कोविड महामारी और सर्दी के मौसम को देखते हुए सरकार को भी यह जल्द समझ आ गया कि उनसे बात करनी चाहिए। हालांकि सरकार ने इसके लिए किसानों को बुराड़ी के संत निरंकारी मैदान में आने का न्यौता दिया और कहा कि जैसे ही सभी किसान मैदान में इकट्ठा हो जाएंगे, सरकार उनसे तुरंत बातचीत करेगी। लेकिन किसानों ने सरकार की इस मांग को ठुकरा दिया और अपने रुख पर अड़े रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि जो सरकार पहले 3 दिसंबर को किसानों से बातचीत करने पर अड़ी थी, उसे 1 दिसंबर को किसानों से बातचीत करने के लिए बुलाना पड़ा।

चौथे दौर की वार्ता का क्या निकला नतीजा 
3 दिसंबर को किसानों और सरकार के बीच चौथे दौर की वार्ता हुई। इस बातीचीत के दौरान एक बार फिर किसानों ने सरकार के सामने कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने कहा कि एमएसपी को कानून का हिस्सा बनाया जाए। इस पर सरकार ने कहा कि एपीएमसी को सशक्त करने पर वह विचार करेंगे। मंडी में ट्रेडर्स का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। कृषि मंत्री ने एमएसपी के सवाल पर कहा कि एमएसपी थी, एमएसपी है और एमएसपी रहेगी। तोमर ने कहा कि सरकार खुले मन से किसानों से बात कर रही है।

किसानों ने सौंपा 10 पन्नों का ड्राफ्ट
वार्ता से पहले किसानों ने सरकार को 10 पन्नों का एक विस्तृत ड्राफ्ट सौंपा था, जिसमें उन्होंने नए कृषि कानून के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी। इसके अलावा किसानों ने सरकार के सामने कुछ मांगें भी रखी हैं। किसानों नेजो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसमें एपीएमसी एक्ट के 17 बिंदुओं पर असहमति जताई है। एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के 18 बिंदुओं पर असहमति के अलावा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट के 12 बिंदुओं पर भी असहमति जताई है।

किन मुद्दों पर असहत हैं किसान

  • एपीएमसी एक्ट के 17 बिंदुओं पर असहमति
  • एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के 18 बिंदुओं पर असहमति
  • कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट के 12 बिंदुओं पर असहमति


वहीं, किसानों ने सरकार से कहा कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर नए कृषि कानून को रद्द किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कुछ अन्य मांगे भी रखी हैं जो इस प्रकार हैं...

कृषि कानून वापस हों

  • एमएसपी कानूनी अधिकार बने
  • डीजल 50 प्रतिशत सस्ता हो
  • स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू हो
  • किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस हों
  • एनसीआर में वायु प्रदूषण एक्ट में बदलाव वापस हो


तीन दौर की बातचीत में क्या निकला
इससे पहले सरकार और किसानों के बीच हुई तीन दौर की बातचीत बेनतीजा रही। एक ओर जहां सरकार किसानों को यह समझाने में लगी रही कि एमएसपी खत्म नहीं होगी, मंडियों को समाप्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि नए कृषि कानून से किसानों को नए अवसर मिलेंगे, नया बाजार मिलेगा। लेकिन किसानों ने इसको लेकर आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में सरकार मंडियों को खत्म कर देगी और एमएसपी पर फसलों की खरीद नहीं की जाएगी। कॉन्टैक्ट फार्मिंग पर भी किसानों ने कहा कि इससे सरकार उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है।

  • पहले दौर की बातचीत में नहीं निकला था कोई नजीता
  • दूसरे दौर की बातचीत भी रही असफल
  • तीसरे दौर की बातचीत बेनतीजा, सरकार ने कहा- सकारात्मक रही चर्चा

Yaspal

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