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कोरोना वायरस: फूलों की फसल पर किसानों ने खुद ही चला दी tractor

2020-04-15T17:24:05.527


 जम्मू (कमल राना): पूरे विश्व पर तबाही मचाने में लगे कोरोना वायरस ने जम्मू के किसानों को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। फ्लोरीकल्चर सैक्टर से जुड़े जम्मू संभाग के सैंकड़ों किसानों का काफी नुकसान पहुंचाया है। फूलों की बिक्री नहीं होने पर जम्मू के किसानों ने स्वयं खेतों में तैयार खड़ी फूलों की खेती पर टै्रक्टर चला दी। जम्मू संभाग में कोविड-19 के कारण फ्लोरीकल्चर सैक्टर पर अनुमानित 70 करोड़ रुपये नुकसान बताया जा रहा है। लगभग 2000 हैक्टेयर भूमि पर उगाई की विभिन्न प्रकार की फूलों की खेती तबाह हो गई है।  

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फूल उत्पादक किसानों का आरोप है कि कई किसानों ने बैंकों से कर्ज लेकर मैरीगोल्ड, ग्लेडियस, गुलाब आदि फूलों की खेती की है लेकिन अचानक कोविड-19 महामारी फैल गई। पूरे संभाग में खेतों में फसल पूरी तरह से तैयार थी और किसान इस बार मुनाफे की आस को लेकर चल रहे थे कि अचानक लाॅकडाऊन की घोषणा की गई। किसानों ने एहतियात के तौर पर उठाए गए सरकार के फैसले का सम्मान किया। फूल उत्पादकों में रोष इस बात का था कि केंद्र सरकार ने लॉकडाऊन के दौरान कृषि और संबंधित कार्यों के लिए छूट दी है। प्रमुख सचिव पशु, भेड़ पालन एवं मत्स्य विभाग नवीन कुमार के निर्देशों पर कृषि और अन्य विभाग पूरे संभाग में सक्रिय हो चुका लेकिन फ्लोरीकल्चर विभाग फूल उत्पादकों की सुध नहीं ले रहा। किसानों ने विभाग से बर्बाद फसल का मुआवजा देने की मांग उठाई और कहा कि सरकार से राहत राशि को जारी करे ताकि उन पैसों से बीज आदि खरीद कर अगली फसल की तैयारी कर सके। 

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कई मुश्किलातों के बाद पनपने लगा फ्लोरीकल्चर उद्योग
सरकार के प्रयासों और जागरूक किसानों के कारण जम्मू-कश्मीर में फ्लोरीकल्चर उद्योग पनपने लगा है और अभी प्रारम्भिक चरण में है। जम्मू संभाग में हजारों टन ढीले फूलों का उत्पादन होता है। पूरे देश में घरेलू उद्योग प्रतिवर्ष 10-20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। फ्लोरीकल्चर ने हाल ही में जम्मू और कश्मीर में इक्नॉमिकल आयाम पैदा किए हैं। एन.एच.बी. डेटाबेस के मुताबिक वर्ष 2012 में लगभग 100 हैक्टेयर के क्षेत्र में फ्लोरीकल्चर की शुरूआत दौर में था जोकि हजारों हैक्टयेर कवर कर रहा है। जम्मू प्रांत विविध कृषि जलवायु परिस्थितियों यानी उपोष्णकटिबंधीय, मध्यवर्ती और समशीतोष्ण से संपन्न है जिसके चलते संभाग के जिला कठुआ, जिला उधमपुर, जिला रियासी और राजौरी जिले के निचले हिस्सों और पूरे जम्मू जिले के तहसील आर.एस.पुरा, ब्लाक मढ़, तहसील अखनूर उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र खेती के अनुकूल है। ये क्षेत्र मैरीगोल्ड, गलेडियस, ट्यूबररोज ओपन फील्ड जबकि लिलियम और गेरबेरा शैड़ों के तले खेती के लिए उपयुक्त हैं। इसी प्रकार संभाग के मध्यवर्ती क्षेत्र कठुआ, उधमपुर और राजौरी जिलों के प्रमुख भागों गेंदा, गेलडियस, लिलियम, गुलाम, कारनेशन जैसे फूलों के उत्पादन के लिए मौसम अनुकूल हैं। समशीतोष्ण क्षेत्र भद्रवाह, किश्तवाड़, पुंछ, डोडा और कठुआ के पहाड़ी क्षेत्र का मौसम मैरीगोल्ड, गलेडियस, लिलियम, रोज, कारनेशन, टयूलिप और गेरबेरा के लिए अनुकूल है। 
 

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किसानों को फौरन राहत नहीं मिली तो डूब जाएंगे किसान: वजीर
जेएंडके किसान काऊंसिल के अध्यक्ष एवं उन्नतशील फूल उत्पादक तेजिन्दर सिंह वजीर ने कठिन समय में कठिनाइयों के दौर से गुजर रहे फूल उत्पादक किसानों को 20,000 प्रति कनाल मुआवजा देने की मांग की। वजीर ने कहा कि जम्मू और कश्मीर यू.टी. में काफी प्रयासों के बाद फ्लोरी उद्योग पनपा और इस सैक्टर को अपनाने में किसानों को काफी जागरूक किया गया। फ्लोरीकल्चर उद्योग को अपनाने वाले हजारों किसानों का सारा दारोमदार इस सैक्टर से जुड़ा। जिन किसानों का सारा दारोमदार फूलों की खेती पर निर्भर है, वे किसान आज काफी परेशान हैं। कोरोना वायरस के कारण संभाग में फ्लोरीकल्चर सैक्टर में अनुानित 70 करोड़ का नुकसान हो चुका है। इस नाजुक घड़ी में राज्य प्रशासन को आगे आना होगा। उन्होंने राज्यप्रशासन और विभाग से अपील की कि कम से कम हमदर्दी के तौर पर ही सही फूल उत्पादकों के पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों को 2500 रुपये प्रति कनाल मुआवजा का प्रावधान है और विभाग को चाहिए कि कम से इतना मुआवजा तो फौरी तौर पर किसानों को जारी करे। राज्य प्रशासन से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अथवा केंद्र सरकार की मध्यवर्ती योजना के तहत फ्लोरीकल्चर के किसानों को पैकेज देने की मांग उठाई। 
 


Monika Jamwal

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