अल नीनो का साया: रबी बुवाई पर संकट... कृषि मंत्रालय की चेतावनी
punjabkesari.in Monday, Sep 28, 2026 - 01:40 PM (IST)
नई दिल्ली: कृषि सचिव अतिश चंद्र ने सोमवार को कहा कि अल नीनो मौसम पैटर्न के कारण आने वाला रबी (सर्दियों का) मौसम बारिश पर निर्भर इलाकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है और अनाज उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
रबी सीजन की तैयारियों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए चंद्र ने कहा कि खरीफ सीजन भी बहुत चुनौतीपूर्ण था, खासकर बारिश पर निर्भर इलाकों में। कई राज्यों को पहले फसल की बुवाई करने और बाद में फसलों को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर में शुरू होती है।
उन्होंने कहा, "हम देख रहे हैं कि आने वाले सीजन में उत्पादन पर काफी हद तक असर पड़ने की संभावना है। और रबी सीजन भी बारिश पर निर्भर इलाकों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।" चंद्र ने कहा कि कुछ राज्यों को मिट्टी में बहुत ज़्यादा नमी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जबकि कम बारिश वाले इलाकों में लंबे समय तक सूखे या तनाव की स्थिति बनी रह सकती है।
उन्होंने कहा कि रबी सीजन के लिए रणनीतियों को उसी के अनुसार तैयार करने की ज़रूरत है। जलवायु परिवर्तन को एक सच्चाई बताते हुए उन्होंने कहा कि सिंचित इलाकों में भी कई जगहों पर बेमौसम और भारी बारिश हुई है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा, "हम सोचते थे कि हमें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना बाद में करना पड़ेगा। लेकिन अब हम बदलाव होते हुए देख रहे हैं, और वे तेज़ी से हो रहे हैं।"
चंद्र ने कहा कि हालांकि भारत ने अनाज के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, लेकिन वह अभी भी दालों, तिलहन और फलों जैसे कुछ बागवानी उत्पादों का आयात करता है। रबी फसलों की बुवाई आम तौर पर कुल लगभग 638 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है, जिसमें से 300 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा में गेहूं, 140 लाख हेक्टेयर में दालें, 87 लाख हेक्टेयर में तिलहन और 55 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज की बुवाई होती है।
