दिल्ली में रेप व छेड़छाड़ के मामलों में 3 गुना बढ़ोतरी

12/7/2019 10:47:41 AM

नई दिल्ली: महिला सुरक्षा को लेकर पूरे देश में आवाज उठ रही है। कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। एक के बाद एक वारदात से पुलिस के प्रति जनता की नाराजगी साफ तौर पर देखी जा सकती है। फिर भी महिला अपराध नियंत्रित को लेकर दिल्ली पुलिस लगातार दावे करती आ रही है। खासकर 16 दिसम्बर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद दिल्ली पुलिस ने हरकत में आई लेकिन फिर भी अपराध को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हुई। 

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2012 के बाद दिल्ली में रेप 3 गुना गढ़े 
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2012 में कुल रेप के 706 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2019 में 15 नवम्बर तक कुल 1947 मामले दर्ज हुए हंै। वहीं छेड़छाड़ और मारपीट की वारदात में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज हुई है। छेड़छाड़ और मारपीट के दिल्ली के विभिन्न थानों में कुल 727 मामले दर्ज हैं। वहीं, 15 नवम्बर 2019 तक कुल 2616 मामले दर्ज हुए हैं। इसके अलावा महिला अपहरण के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2012 में महिला अपहरण के कुल 20148 मामले दर्ज हुए थे। वहीं इस साल अबतक कुल 3104 मामले दर्ज हो चुके हैं। 


पूर्व पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी का मास्टर प्लान कागजों में ही सिमट गया
वर्ष 2012 में निर्भया कांड के बाद पुलिस द्वारा महिला सुरक्षा को प्राथमिकता बताने के बाद भी हर साल वारदात में हो रही बढ़ोतरी को दखते हुए वर्ष 2015 में गृहमंत्रालय ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई थी। गृह मंत्रालय ने उस समय तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद तत्कालीन पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने मंत्रालय को एक मास्टर प्लान सौंपा था, लेकिन वास्तविकता यह है कि कमिश्नर की ये सभी योजनाएं अभी तक फाइलों में ही दफन हैं। ये योजनाएं जिनको कमिश्नर ने जल्द लागू करने का दावा किया था।


 


Edited By

Anil dev

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