दिल्ली: कांग्रेस का नहीं खुला खाता, सुभाष चोपड़ा-पीसी चाको का इस्तीफा मंजूर

2020-02-12T21:17:55.36

नेशनल डेस्कः दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा और दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने अपना इस्तीफा दे दिया था। अब सुभाष चोपड़ा और पीसी चाको का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। दरअसल, पार्टी के दिल्ली प्रभारी पद से इस्तीफा देने वाले पीसी चाको पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बारे में अपने एक कथित बयान को लेकर कुछ नेताओं के निशाने पर आ गए तो कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने उन नेताओं को आड़े हाथ लिया जो कांग्रेस के सफाए के बावजूद चुनाव परिणाम को भाजपा के खिलाफ जनादेश के तौर पर पेश करके खुशी का इजहार कर रहे हैं।
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दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बारे में की गई कथित टिप्पणी के बारे में सुरजेवाला ने कहा कि चाको ने खुद कहा कि उन्होंने दिवंगत शीला दीक्षित के बारे में कुछ नहीं कहा है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस में उस वक्त एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब चाको ने कथित तौर पर कहा कि कांग्रेस पार्टी का पतन 2013 में शुरू हुआ जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं। बाद में चाको ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी तरह से शीला दीक्षित को जिम्मेदार नहीं ठहराया है, बल्कि सिर्फ यह तथ्य रख रहे थे कि पार्टी का प्रदर्शन कैसे धीरे-धीरे खराब होता चला गया और कांग्रेस का वोट आप की तरफ चला गया।
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दिल्ली महिला कांग्रेस की प्रमुख शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की जीत को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम द्वारा विपक्ष का हौसला बढ़ाने वाला परिणाम करार दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने भाजपा को पराजित करने का काम क्षेत्रीय दलों को आउटसोर्स कर दिया है तो प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (पीसीसी) को अपनी दुकान बंद कर देना चाहिए।
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दरअसल, चिदंबरम ने मंगलवार को ट्वीट किया था, ‘‘अगर मतदाता उन राज्यों के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां से वे आए थे, तो दिल्ली का मत विपक्ष का यह विश्वास बढ़ाने वाला है कि भाजपा को हर राज्य में हराया जा सकता है। दिल्ली का वोट राज्य विशेष के वोट की तुलना में अखिल भारतीय वोट है क्योंकि दिल्ली एक मिनी इंडिया है।'' शर्मिष्ठा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मंगलवार को भी पार्टी के शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने में विलंब और एकजुटता में कमी की बात कही थी। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने 62 सीटें हासिल करके शानदार जीत दर्ज की है। भाजपा को महज आठ सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।


Yaspal

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