See More

पार्किंग समस्या सर्वाधिक गंभीर समस्याओं में से एक: सुप्रीम कोर्ट

2019-09-02T22:26:00.333

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने पार्किंग को सर्वाधिक गंभीर समस्याओं में से एक बताया और दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी प्रकार के निर्माण को मंजूरी देने के पहले अगले 25 सालों की पार्किंग जरूरतों का ठीक प्रकार से आकलन किया जाए। शीर्ष अदालत ने सभी नगर निकायों-नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, पूर्वी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली छावनी बोर्ड को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि रिहायशी इलाकों में फुटपाथों से अतिक्रमण हटाया जाए और पैदलयात्री ही इसका इस्तेमाल करें। 

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि दिल्ली मेंटिनेंस एंड मैनेजमेंट ऑफ पार्किंग प्लेस नियम, 2019 के मसौदा नियमों को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाए, 30 सितंबर के बाद नहीं। न्यायालय ने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी का कर्तव्य होगा कि नियम अक्षरश: लागू हों। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अपने आदेश में कहा,‘फुटपाथों पर अतिक्रमण करने वाले लोगों को अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का नोटिस जारी किया जाए और अगर वे अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो इन्हें नगर निगम अधिकारियों अथवा संबंधित अधिकारियों द्वारा हटाया जाए,जिसका खर्च अतिक्रमण करने वाला वहन करेगा और इसे भूमि राजस्व बकाया माना जाएगा।'

पीठ ने कहा कि अधिकारी लगातार अतिक्रमण करने वालों को नगर निगम की सेवाएं बंद करने जैसे नियम बनाने पर भी विचार कर सकते हैं । न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई अगले वर्ष 13 जनवरी नियत की। गौरतलब है कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण के मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय में पार्किंग का मुद्दा सामने आया था। 


shukdev

Related News