रंग भी ठीक कर सकते हैं आपका स्वास्थ्य, अपनाएं कलर थैरेपी

2020-04-30T20:19:53.937

नई दिल्ली/डेस्क। लोग अक्सर घर पर रहते हुए तनाव में आ जाते हैं और नींद, आराम, सुकून को भूल जाते हैं। लोग कुछ पुराने प्रयोग अपनाते हैं, हालांकि कुछ लोग कुछ कुइक टिप्स भी अपना रहे हैं लेकिन इनका गहरा असर नहीं हो रहा है। ऐसे में बरसों पुरानी एक थैरेपी एक फिर चर्चा में आ गई है।

इस थैरेपी का नाम है कलर थैरेपी। जानकर बताते हैं कि इस थैरेपी में मानसिक और शारीरिक शांति, सुकून और आराम मिलता है। यह थेरेपी शारीरिक और भावनात्मक समस्याओं को भी ठीक करने में सक्षम है।

क्या है कलर थैरेपी
चिकित्सीय भाषा में कहें तो इस कलर थैरेपी को क्रोमोपैथी, क्रोमोथेरेपी के नाम से भी जाना जाता है। इस थेरेपी में इंसान के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्तर को बैलेंस किया जाता है। ये खास कर तनाव को दूर करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

इस थैरेपी से व्यक्ति को सुकून और शांति मिलती है। शरीर से थकान चली जाती है और शरीर में ऊर्जा के प्रवाह होता है।

इन रंगों का किया जाता है इस्तेमाल
-इसमें हरे रंग का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है। ये रंग सभी रंगों में सबसे बैलेंस रंग माना जाता है। इससे ही इस थैरेपी की शुरुआत की जाती है। अगर कोई भी उदास, निराश या नीरस महसूस करता है तो उसकी मेंटल कंडीशन को सुधार देता है। यहां ये भी ध्यान देना होगा कि इसमें गहरे हरे का ही प्रयोग किया जाता है।

-लाल रंग का इस्तेमाल शारीरिक उपचार के लिए किया जाता है। क्योंकि ये भावनात्मक प्रभाव को बढ़ा देता है।ऐसा माना जाता है कि इस रंग से ब्लड सेल्स का भी निर्माण होता है। इसका मानसिक प्रयोग तब करते हैं जब मेंटल कंडीशन सीरियस हो।

- नीला एक शांत और ठंडा रंग है इसका प्रयोग आपको अधिक शांत और आराम करने के देने के लिए मदद करता है। नील रंग का इस्तेमाल तब किया जाता है जब पित्त और बुखार हो। इससे व्यक्ति को आराम मिलता है।

- बैंगनी रंग का इस्तेमाल करना ज्ञान को बढ़ाने का प्रयास करना है। बैंगनी रंग को दृढ़ता से सुंदरता, आध्यात्मिकता और आनंद के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है। इस रंग का इस्तेमाल माथे और गर्दन पर किया जाता है, ताकि व्यक्ति शांत रहे और उसकी एकाग्रता बढ़ें।

 

 


Chandan

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