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गलवान संघर्ष और कोरोना संक्रमण का असर, बहिष्कार के आहवान से बाजारोंं से गायब हुई चीनी राखी

2020-07-31T14:05:17.787

साम्बा (संजीव): एक तो वुहान के कोरोना वायरस के संक्रमण का डर और दूसरा लद्दाख की गलवान घाटी में चल रही तनातनी का असर राखी के त्यौहार पर भी दिख रहा है। गलवान में भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद देश भर में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के आहवान के चलते इस बार बाजारों से चीनी राखियाँ लगभग नदारद हैं।  लॉकडाउन के बीच मिली छूट के बीच आज बड़ी संख्या में युवतियाँ और महिलाएं बाजारों में पहुंची और राखी की खरीददारी की। प्रशासन के निर्देशों और कोरोना संक्रमण के डर बावजूद दुकानों पर महिलाओं की भीड़ दिखी।PunjabKesari

 

 

दुकानोंं पर सोशल डिस्टेंसिंग जैसा भी कुछ नहीं दिखा और कई महिलाएं तो बिना मास्क के ही दुकानों में मोलभाव करते दिखीं। सरकारी निर्देश के अनुसार न तो दुकानों पर हाथ सेनिटाईज करने का कोई प्रबंध था और कई जगह तो दुकानदार व काम करने वाले कर्मी भी बिना मास्क और दस्तानों के दिखे। वहीं कई दुकानदारों का कहना था कि एक तो पहले से ही इस बार लॉकडाउन के चलते काम बेहद कम है दूसरे लोग भी कोरोना के डर से बाजार में कम आ रहे हैं। 


    कई दुकानदारों ने बताया कि इस बार लोगों में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए चीनी माल यानि राखियाँ-खिलौने आदि भी नहीं मंगवाया गया है। हालांकि कुछेक दुकानदारों ने बताया कि पिछले साल का बचा हुआ कुछ चीनी सामान है जो वह बेच रहे हैं। जिले की 4 तहसीलोंं में 4 अगस्त तक जारी लॉकडाउन के चलते दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि कम से कम दो दिन के लिए कपड़ों, रेडीमेड, गिफ्ट शॉप्स, मिठाई आदि की दुकानों को खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। 
 


Monika Jamwal

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