निर्भया केस के बाद पिछले 5 साल में तेजी से बढ़े हैं महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले

12/6/2019 6:35:08 PM

नेशनल डेस्कः हैदराबाद में रेप और हत्या का मामला, उन्नाव में रेप पीड़िता को आग लगाना या फिर कठुआ मामला, इन सभी जघन्य अपराधों से साफ होता है कि देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। 26 साल की वेटेनरी डॉक्टर जब अपने घर लौट रही थी तो गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। उन्नाव की रेप पीड़िता जब कोर्ट जा रही थी तो रास्ते में ही पांच लोगों ने उसकी हत्या करने की कोशिस की। उनमें से दो रेप के आरोपी थे। पीड़िता 90 फीसदी जल गई और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
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इसी तरह जम्मू-कश्मीर के कठुआ में भी 8 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की गई। इतने केस तो लोगों के सामने आ गए लेकिन आंकड़ों की बात करें तो दरिंदगी के मामलों की फेहरिस्त लंबी है। 2017 की एनसीआरबी की रिपोर्ट से पता चलता है कि साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3.59 मामले दर्ज किए गए। साल 2016 में 3.38 ऐसे केस दर्ज हुए थे।
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महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध में 10 फीसदी मामले रेप के हैं। 2017 में 32,559 रेप केस दर्ज हुए थे। इसमें मध्य प्रदश में सबसे ज्यादा 5,562 मामले दर्ज हुए। वहीं 4,246 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर और राजस्थान (3,305) तीसरे स्थान पर रहा।
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कोई भी इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता कि बहुत सारे ऐसे भी रेप के मामले होते हैं जो सामने नहीं आते क्योंकि पीड़िता का परिवार ही इन्हें बेइज्जती के डर से दबा देता है। जो लोग हिम्मत दिखाते हैं वे न्याय के लिए वर्षों कोर्ट के चक्कर लगाते रहते हैं। जैसे कि निर्भया केस के सात साल बाद भी दोषियों को फांसी नहीं हुई है।


Yaspal

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