दिल्ली में BJP के लिए ‘आप’ को सत्ता से हटाना होगा मुश्किल

2020-01-09T10:58:56.447

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव का ऐलान हो गया। इसके साथ ही सत्तारूढ़ ‘आप’ तथा विपक्षी दल भाजपा व कांग्रेस के बीच तीखा प्रचार शुरू कर दिया है। ‘आप’ प्रमुख अरविंद केजरीवाल जहां तीसरी बार सत्ता पाने के लिए मैदान में हैं, वहीं 21 साल से दिल्ली की सत्ता से दूर भाजपा लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन से उत्साहित तथा कांग्रेस भी 2015 के विधानसभा चुनाव में रहे अपने शर्मनाक प्रदर्शन को सुधारने के लिए चुनावी रण में कूदेंगी।

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चुनावी रण में कांग्रेस के मुकाबले बेहतर दिख रही भाजपा के लिए भी ‘आप’ को सत्ता से हटाना मुश्किल होगा। इसके साथ ही गुटबाजी से उलझीं भाजपा-कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती पार्टी को एक रखना होगा। कांग्रेस के पास विरोधियों पर हमला करने के लिए हथियार के तौर पर शीला दीक्षित के कार्यकाल में किए विकास कार्य ही हैं। जिसके चलते पार्टी अपने पिछले कार्यकाल के कामकाज को ही प्रमुखता दे रही है। वहीं केंद्रीय नेतृत्व ने सुभाष चोपड़ा व कीॢत आजाद को कमान देकर पार्टी को एकजुट करने की कोशिश अवश्य की है,लेकिन पार्टी गुटबाजी से अब भी पार नहीं पा सकी है। 

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मुफ्त सेवा व शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार का दावा 
पिछले विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई ‘आप’ सरकार इस बार कामकाज के भरोसे मतदाताओं के सामने जाएगी। जहां वह मुफ्त बिजली-पानी तथा महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा के तीरों से लैस होगी, वहीं शिक्षा व्यवस्था तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावे भी उसके मुख्य चुनावी हथियार होंगे।  

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भाजपा को मोदी के चेहरे पर भरोसा
भाजपा का दिल्ली में समय बदला और प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के नेतृत्व में तीनों निगमों पर कब्जा करने के साथ ही लोकसभा की सभी सातों सीटें फिर से जीत लीं। प्रदेश में पार्टी के नेता-कार्यकत्र्ता इससे उत्साहित भी हैं, लेकिन फिर भी पार्टी सतर्क नजर आ रही है। प्रदेश के किसी नेता को सामने लाने की बजाय पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चेहरा ही अब तक आगे रखा है और अनाधिकृत कालोनियों में रहने वालों को संपत्ति का मालिकाना हक देने के फैसले पर है। 


Edited By

Anil dev

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