देश के इस मंदिर में उठी अब बड़ी मांग, अनुष्ठान से ''सलाम'' शब्द हटाने का प्रस्ताव...टीपू सुल्तान ने शुरू की थी प्रथा

punjabkesari.in Friday, May 20, 2022 - 01:57 PM (IST)

नेशनल डेस्क: कर्नाटक के प्रसिद्ध चेलुवनारायण स्वामी मंदिर में हर रोज शाम को होने वाले अनुष्ठान का नाम ‘देवतीगे सलाम’ से बदलकर ‘संध्या आरती’ रखने का प्रस्ताव रखा गया है। कर्नाटक में मंदिरों का प्रबंधन करने वाले मुजराई विभाग को मंड्या जिले में मेलकोट के प्रसिद्ध चेलुवनारायण स्वामी मंदिर प्रशासन की ओर से एक प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव में हर रोज शाम को होने वाले अनुष्ठान का नाम ‘देवतीगे सलाम’ से बदलकर ‘संध्या आरती’ रखने की मांग की गई है। इस संबंध में मंदिर के पुजारियों, पदाधिकारियों और परिचारकों की उपस्थिति में एक बैठक बुलाई गई थी।

 

सालों से ऐतिहासिक चेलुवनारायण स्वामी मंदिर के पुजारी शाम 7 बजे ‘देवतीगे सलाम’ करते आए हैं। फारसी शब्द ‘सलाम’ पर आपत्ति जताते हुए मांड्या जिला धार्मिक परिषद ने जिला प्रशासन को फारसी शब्द को हटाने और उसकी जगह पारंपरिक संस्कृत वाक्यांश ‘संध्या आरती’ रखने के लिए एक ज्ञापन सौंपा है। जिला प्रशासन ने धार्मिक परिषद से मिला अनुरोध मुजराई विभाग को भेज दिया है। दरअसल मंदिर में  ‘देवतीगे सलाम’ की प्रथा हैदर अली और टीपू सुल्तान के शासनकाल के दौरान हुई थी।

 

मैसूर स्थित कर्नाटक ओपन यूनिवर्सिटी में प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग के प्रमुख प्रोफेसर शाल्वा पिले अयंगर ने कहा कि देवतीगे सलाम प्रथा की शुरूआत हैदर अली और टीपू सुल्तान के शासनकाल के दौरान हुई थी। उन्होंने मंदिर के पुजारियों को उनके सम्मान में पीठासीन देवता की विशेष आरती करने का आदेश दिया था। बता दें कि इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी इसी तरह की मांग करते हुए कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर से देवतीगे सलाम को कथ्म करने को कहा था। विहिप ने कहा था कि यह रस्म टीपू सुल्तान को याद करने की है।


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Content Writer

Seema Sharma

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