ऑफ द रिकॉर्डः ...और मोदी ने अयोध्या से चीन को निशाना बनाकर छोड़ा तीर

2020-08-07T04:33:23.627

नई दिल्लीः कल यह बात लोगों के ध्यान में नहीं आई। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का शिलान्यास करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के खिलाफ एक तल्ख टिप्पणी की कि ‘भय बिनु होय न प्रीति।’ यद्यपि मोदी ने इस संदर्भ में चीन का नाम नहीं लिया परंतु लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल.ए.सी.) पर जारी सैन्य तनाव के बीच यह समझा जा सकता है कि यह टिप्पणी किस ओर इंगित है। जब से लद्दाख में चीनी घुसपैठ हुई है, मोदी इस पड़ोसी देश से कठोरता से निपट रहे हैं। 

कमांडर व अन्य स्तरों पर बातचीत के दौरान चीन यह दावा करता रहा है कि सीमा से उसने अपने सैनिक हटा लिए हैं परंतु भारत चीन के इन दावों में झूठ देख रहा है। चीन के इस रवैए से मोदी अत्यंत क्षुब्ध हैं। मोदी ने अपने संबोधन में चीन का नाम एक अन्य संदर्भ में लिया। उन्होंने कहा कि चीन उन देशों में से एक है जहां राम को पूजनीय माना जाता रहा है।

चीन के साथ उन्होंने ईरान का भी उल्लेख किया। मोदी ने यह भी कहा कि पांच दक्षिण एशियाई देशों इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, लाओस व कंबोडिया तथा पड़ोसी देशों नेपाल व श्रीलंका में भी राम पूजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों में प्राचीन ग्रंथ रामायण का सांस्कृतिक प्रभाव आज भी देखा जा सकता है। 

मोदी एक तरफ तो राम और उनकी शिक्षा की सर्वव्यापकता का बखान कर रहे थे, दूसरी ओर वह अप्रत्यक्ष रूप से मुस्लिम राष्ट्र इंडोनेशिया को खुश करने की कोशिश कर रहे थे। मोदी चाहते हैं कि दुनिया के सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया से रणनीतिक व सांस्कृतिक संबंध आगे बढ़ाए जाएं। उन्होंने कहा कि जब देश शक्तिशाली होता है, तभी वह शांति स्थापित कर सकता है। 

मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भारत द्वारा अपनी सुदृढ़ सांस्कृतिक विरासत को दुनियाभर में पहुंचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिएं। इस सबसे के बीच, मोदी का ‘भय बिनु होय न प्रीति’ का उल्लेख करने से राजनयिक क्षेत्र के लोग हैरान हैं। उन्हें लगता है कि इससे संकेत मिलते हैं कि भारत-चीन सीमा विवाद हल करना इतना आसान नहीं होगा।   


Pardeep

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