दिल्ली में नौ में से आठ स्थानों के पानी के नमूने दूसरी जांच में पीने योग्य पाए गए: DJB

11/22/2019 9:26:45 PM

नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में नौ में से आठ स्थानों के पानी के नमूने दूसरी जांच में पीने योग्य पाए गए हैं। ये नमूने उन स्थानों से एकत्र किए गए, जिनका जिक्र बीआईएस की एक हालिया रिपोर्ट में किया गया था। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने 16 नवंबर को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की यह रिपोर्ट जारी की थी, जिसके बाद केंद्र और शहर की सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

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गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले (बीआईएस) ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि दिल्ली से लिए गए पानी के सभी 11 नमूने जल की गुणवत्ता मापने वाले 19 मापदंडों पर खरे नहीं उतरे। इसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में पेयजल की गुणवत्ता देश में सबसे खराब है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के उपाध्यक्ष दिनेश मोहनिया ने कहा,‘ केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान के आधिकारिक आवास सहित पेयजल के नमूने दो जगह से नहीं लिए जा सके। जबकि एक नमूना एक मानदंड पर खरा उतरने में विफल रहा, उसमें जरूरत से कम क्लोरिन थी।'

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मोहनिया ने कहा कि जनता विहार की गीता देवी के घर से लिए गए नमूने ‘पीने के योग्य नहीं पाए गए' क्योंकि उसमें क्लोरिन की मात्रा जरूरत से कम थी। उन्होंने बताया कि 31 मानदंडों पर तीन प्रयोगशालाओं ने नमूनों की जांच की। डीजेबी के उपाध्यक्ष ने कहा,‘ कृषि भवन स्थित पासवान के कार्यालय से लिए गए पानी के नमूने पीने योग्य पाए गए।'उन्होंने बताया कि मुझे नहीं पता कि पासवान के आधिकारिक आवास 12 जनपथ से नमूने क्यों नहीं लिए जा सके। मोहनिया ने कहा,‘सोनिया विहार में विनोद कुमार का घर पिछले तीन महीने से बंद पड़ा है। हम फोन पर भी उससे सम्पर्क नहीं कर पाए। यह भी पता नहीं चल पाया है कि बीआईएस अधिकारियों ने उसके घर से नमूने लिए थे, या नहीं।'

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उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार शनिवार से पूरे शहर से नमूने लेने शुरू करेगी। मीडिया और लोगों को सार्वजनिक नोटिस जारी कर इस बारे में जानकारी दी जाएगी कि कहां से किस दिन नमूने एकत्रित किए जाएंगे। उन्होंने कहा,‘ मीडिया आकर पूरी प्रक्रिया को कवर कर सकती है। हम पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे। नमूने एकत्रित किए जाने के बाद, नतीजे आने में 48 घंटे का समय लगता है। हम उसे मीडिया और लोगों के साथ साझा करेंगे।'

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उन्होंने कहा कि बीआईएस अधिकारी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। हालांकि वह अपनी ‘विश्वसनीयता खो चुके हैं लेकिन चाहे तो वे आ सकते हैं।' मोहनिया ने कहा कि आरओ (रिवर्स ओसमोसिस) कम्पनियों की निकाय ‘वॉटर क्वालिटी इंडिया एसोसिएशन'(डब्ल्यूक्यूआईए) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मई 2019 में दिए आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। एनजीटी ने वहां आरओ सिस्टम के उपयोग पर रोक लगा दी थी, जहां पीने के पानी की आपूर्ति में कुल टीडीएस 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम था। उन्होंने कहा,‘ डब्ल्यूक्यूआईए ने इस बीआईएस की इस रिपोर्ट को शीर्ष अदालत के समक्ष पेश किया है।'


shukdev

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