राज शाही पोशाक पहन कर सिंधिया ने किया शमी पूजन, वर्षों पुरानी है ये परपंरा

10/10/2019 1:54:33 PM

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सिंधिया राजवंश की प्राचीन धार्मिक परंपरा के अनुसार दशहरे के पर्व पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शमी पूजन किया। यह आयोजन मांढरे की माता के पास स्थित प्रांगण में हुआ। जिस मौके पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के चिरंजीव महाआर्यमन सिंधिया भी मौज़ूद थे। शमी पूजन के बाद श्री सिंधिया ने सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए देश प्रदेश के नागरिकों की सुख संपन्नता की कामना की। बता दें यहां शमी पूजन की ये परंपरा लगभग 200 साल पुरानी है जिसे सिंधिया राजघराना निभाता है।

पंजाब केसरी के रिपोर्ट अंकुर जैन की पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया राजसी वेशभूषा में अपने बेटे के साथ आज शाम शमी पूजन के लिए मांढरे की माता के पास दशहरा प्रांगण पहुंचें। इस अवसर पर सिंधिया राजघराने के सरदार और सिपहसाल रहे प्रमुख लोग भी मौज़ूद थे। श्री सिंधिया ने उनसे मुलाकात की तत्पश्चात सिंधिया राजवंश की धार्मिक मान्यताओं और रीति रिवाजों के अनुसार उनके राज पुरोहितों ने बिधि-विधान से शमी पूजन कराया और उसके बाद श्री सिंधिया ने तलवार से शमी के वृक्ष को छुआ और इस तरह शमी पूजन की विधि सम्पूर्ण हुई। इस मौके पर सिंधिया ने कहा कि देश प्रदेश में खुशहाली रहे सभी अच्छा जीवन बिताएं।

सिंधिया राजवंश के पुरोहितों ने बताया कि यह सिंधिया राजाओं की सैकड़ो साल पुरानी परंपरा है जब यहां के राजा कोई युद्ध जीत कर आते थे तो वापिस आते ही शमी पूजन करते थे जिससे उनको युद्ध में बिजय होने का आशीर्वाद मिलता था। फिर चाहे वो रण का युद्ध हो या राजनीति में सफलता का। तो वहीं लोगों का कहना है कि शमी वृक्ष जीत और संपन्नता का धोतक है। दशहरे पर पूजा के बाद तलवार से शमी वृक्ष को छुआ कर उसकी पत्तियां बांटी जाती हैं और सुखमय जीवन की कामना की जाती है।


Jyoti

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