हुर्रियत एवं अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापसी पर कोर्ट ने वापस मांगी स्टेटस रिपोर्ट

2019-11-22T13:03:16.043

जम्मू: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल एवं जस्टिस राजेश बिंदल ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि हुर्रियत एवं अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापसी को लेकर ताजा स्टेटस रिपोर्ट को अगली सुनवाई पर दायर किया जाए। जनहित याचिका के माध्यम से हुर्रियत एवं अलगाववादी नेताओं के समक्ष रखा गया, जो देशद्रोही गतिविधियों और जम्मू एवं कश्मीर के हित के विरूद्घ गतिविधियों को चलाए हुए हैं।

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जनता के पैसे इन पर खर्च किए जा रहे है
जनहित याचिका में कहा गया कि कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने से जम्मू-कश्मीर में युद्घ जैसे हालात बनाए गए। सीमा पार बैठी विघनकारी ताकतों ने अपने कश्मीर में एजैंटों के माध्यम से हालात खराब किए, जबकि राज्य की सुरक्षा की बजाए उन्होंने कानून व्यवस्था को बिगाड़ने में भूमिका निभाई और अलगाववाद का एजैंडा चलाते रहे जिससे सांप्रदायिक घृणा फैली व कश्मीरी पंडित समुदाय को कश्मीर से भागना पड़ा। हैरानी है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बजाए प्रतिवादी बड़ा तदाद में खर्चा कर इन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहा हैं, जिसमें रहने, ठहरने, स्वास्थ्य सुविधाओं एवं खाने-पीने का भी बंदोबस्त सरकार की ओर से जनता के उस पैसे से किया जा रहा है जो टैक्स से एकत्र हुआ है।

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मीडिया के विरुद्ध लक्ष्मण रेखा खींचने की जरूरत
याचिका में कहा गया है कि सरकार की आतंकवादियों और अलगाववादियों से निपटने की कुछ भी नीति रही हो, लेकिन अलगाववादी एवं उनके एजैंट कश्मीर में भारत के संविधान औऱ विलय को चुनौती देने सहित भारत की एकता एवं अखंडता के विरोध में नारेबाजी करते रहे हैं। याचिका में कहा गया कि जम्मू कश्मीर में मौजूदा हालात झूठी और मनघडंत खबरों से भी बने हैं, जो भड़काने का काम करती है, जबकि हकीकत में कुछ और होता है। इलैक्ट्रॉनिक, प्रिंट औऱ सोशल मीडिया ने अफवाहों को फैलाया, जिससे अशांति फैली। ऐसे में झूठी खबरें फैलाने वाले मीडिया के विरूद्घ लक्ष्मण रेखा खींचने की जरूरत है, ताकि जम्मू-कश्मीर में हालात सुधरे।


Author

rajesh kumar

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