पाकिस्तान में तेज हुई आजादी की मांग, कराची की सड़कों पर उतरे लोग

2019-11-20T10:32:21.503

 

इस्लामाबादः पाकिस्तान में आजादी की चिंगारी अब तेजी से भड़कती जा रही है। बलूचिस्तान और लाहौर में आजादी को चल रहे प्रदर्शनों के बाद अब स्वतंत्र सिंधुदेश की मांग को लेकर सिंधु समुदाय के हजारों लोग कराची की सड़कों पर उतर आए हैं। इन लोगों के समर्थन में आवाज उठाने वाले नेताओं के खिलाफ पाकिस्तान सरकार ने सोमवार (18 नवंबर) को कई आरोपों में मामले दर्ज कराएं हैं।

 

सिंधी समुदाय का कहना है कि सिंध अपने आप में अलग राष्ट्र है, लेकिन पाकिस्तान ने उस पर जबरन कब्जा जमा रखा है। पाकिस्तान से स्वतंत्र सिंधुदेश बनाने की मांग पहली बार वर्ष 1972 में सिंधी नेता जीएम सईद ने उठाई थी। वर्ष 1995 में जीएम सईद के निधन के बाद सिंधुदेश के आंदोलन को आगे भी जारी रखने के उद्देश्य से एक अलग पार्टी जय सिंध कौमी महाज (जेएसक्यूएम) का गठन किया गया। देशभर से अपनी मांग के समर्थन में जुटे सिंधी नागरिकों ने 2 दिन कराची में गुलशन-ए-हदीद से प्रेस क्लब तक मार्च किया।

 

हाथों में सिंधुदेश के प्रतीक लाल झंडे लिए हजारों लोगों ने स्वतंत्र देश के समर्थन में नारे लगाए। जय सिंध कौमी महाज (जेएसक्यूएम) ने इस मार्च का आयोजन किया था। जेएसक्यूएम के अध्यक्ष सुनान कुरैशी और अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने इस मौके पर जुटे लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने सिंधी भाषा और संस्कृति पर मंडरा रहे खतरे को अपनी मांगों की मुख्य वजह बताया।

 

सिंधु समुदाय के समर्थन में आवाज उठाने वाले नेताओं के खिलाफ इमरान सरकार आपत्तिजनक नारेबाजी, विद्रोह, आतंकवाद और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामले दर्ज कर रही है। आतंकवाद रोधी कानून के तहत दर्ज मामलों में आरोप लगाया गया कि जेएसक्यूएम के अध्यक्ष सुनान कुरैशी, उप अध्यक्ष इलाही बख्श एवं कई और नेताओं ने देश सरकार व संस्थानों के खिलाफ विद्रोह भड़काने की कोशिश की। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।


Tanuja

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