सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस से मिलकर उत्पन्न हुआ ओमीक्रोन ! संक्रमण की संभावना 3 गुना अधिक: अध्ययन

punjabkesari.in Saturday, Dec 04, 2021 - 11:36 AM (IST)

न्यूयॉर्क: कोरोना वायरस के नए वेरियंट ओमीक्रॉन को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न दावे किए जा रहे है और इसके प्रभाव को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं।  वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक प्रारंभिक अध्ययन से पता चलता है कि डेल्टा या बीटा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॅान वैरिएंट में पुन: संक्रमण होने की संभावना तीन गुना अधिक है। अब एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि हो सकता है ओमाइक्रोन सामान्य शीत वायरस से उत्परिवर्तित यानि उत्पन्न हुआ हो सकता है लेकिन यह कितना गंभीर है इसके बारे में कुछ भी कहना जल्दबादी होगी ।  हाल ही में हुए एक शोध में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि इस वेरिएंट ने किसी अन्य वायरस के जेनेटिक मेटेरियल से मिलकर खुद को म्यूटेशन कर लिया है।

 

शोधकर्ताओं के अनुसार ओमिक्रोन ने सामान्य जुकाम वायरस से मिलकर म्यूटेशन किया होगा क्योंकि यह कोरोना के किसी पुराने जेनेटिक सीक्वेंस से मेल नहीं खाता। मगर, यह कई अन्य वायरस में मिलता है, जिनमें से एक सामान्य सर्दी-जुकाम भी है। यह ह्यूमन जीनोम में भी पाया जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस स्थिति में यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में आसानी से फैल सकता है। यही नहीं, हल्के या बिना लक्षण वाले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। शोधकर्ता सुंदरराजन और उनके साथियों का कहना है कि ऐसा जेनेटिक सीक्वेंस सर्दी का कारण बनने वाले एक कोरोना वायरस में भी दिखता है, जिसे एचसीओवी- 229ई कहा जाता है। बता दें कि ओमिक्रोन वायरस पहले SARS-CoV-2 (कोरोना वायरस) और अन्य वायरस से संक्रमित दोनों रोगजनक व्यक्ति में पाया गया था। 

 

शोधकर्ताओं के अनुसार ओमीक्रॉन जो COVID  का कारण बनता है संभवतः शीत वायरस से उत्पन्न  हुआ हो सकता है । शोधकर्ताओं ने कहा कि यह आनुवंशिक अनुक्रम कोरोनवायरस के किसी भी पुराने संस्करण में प्रकट नहीं होता है, जिसे SARS-CoV-2 कहा जाता है, लेकिन कई अन्य वायरस में  आम हो सकता   है, जिनमें सामान्य सर्दी और मानव जीनोम भी शामिल हैं। इस संबंध में की जा रही रिसर्च का नेतृत्व करने वाले  कैम्ब्रिज के वेंकी साउंडराजन, मैसाचुसेट्स-आधारित डेटा एनालिटिक्स फर्म नेफर ने कहा कि इस विशेष स्निपेट को अपने आप में डालने से ओमाइक्रोन खुद को "अधिक मानवीय" बना सकता है ।

 


इसका मतलब यह हो सकता है कि वायरस अधिक आसानी से फैलता है और केवल हल्के या छूने वाले रोगों का कारण बनता है। वैज्ञानिकों को अभी तक यह नहीं पता है कि ओमाइक्रोन अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक संक्रामक है या नहीं, क्या यह अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है या क्या यह सबसे प्रचलित संस्करण के रूप में डेल्टा से आगे निकल जाएगा। इन सवालों के जवाब मिलने में कई हफ्ते लग सकते हैं। पहले के अध्ययनों के अनुसार, फेफड़े और जठरांत्र प्रणाली में कोशिकाएं SARS-CoV-2 और सामान्य-कोल्ड कोरोनविर्यूज़ को एक साथ बंद कर सकती हैं।

 

इस तरह का सह-संक्रमण वायरल पुनर्संयोजन के लिए दृश्य निर्धारित करता है, एक प्रक्रिया जिसमें एक ही मेजबान सेल में दो अलग-अलग वायरस स्वयं की प्रतियां बनाते समय बातचीत करते हैं, नई प्रतियां उत्पन्न करते हैं जिनमें "माता-पिता" दोनों से कुछ अनुवांशिक सामग्री होती है। दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक प्रारंभिक अध्ययन से पता चलता है कि डेल्टा या बीटा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॅान वैरिएंट  में पुन: संक्रमण होने की संभावना तीन गुना अधिक है। गुरुवार को प्रकाशित अध्‍ययन देश की स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली द्वारा एकत्रित डाटा पर आधारित है। यह ओमिक्रॉन की संक्रमण से बचने की क्षमता के बारे में महामारी विज्ञान का पहला प्रमाण पेश करता है. पेपर एक मेडिकल प्रीप्रिंट सर्वर पर अपलोड किया गया था और अभी तक इसकी समीक्षा नहीं की गई।

 


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Content Writer

Tanuja

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