जुलाई आंदोलन' के शहीदों की सरकारी लिस्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा, बाखर अली कैसे बना कबीर?
punjabkesari.in Saturday, Jul 25, 2026 - 10:15 AM (IST)
Bangladesh Martyrs List Scam : बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार को गिराने वाले 'जुलाई मूवमेंट' के दौरान तैयार की गई शहीदों की ऑफिशियल लिस्ट में नौ महीने की लंबी जांच में बड़े पैमाने पर हेरफेर और धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट और रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों के एक ग्रुप की जांच के मुताबिक अंतरिम सरकार ने लिस्ट में ऐसे लोगों को शामिल किया है जिनका विरोध प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं था, ताकि आंदोलन को और खतरनाक दिखाया जा सके।
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑफिशियल गजट में शामिल लगभग आधे लोगों की मौत 5 अगस्त, 2024 के बाद हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीरियल नंबर 1 से 24 वाले लोग 5 अगस्त से पहले मर गए थे लेकिन उनका कोटा आंदोलन या सरकार विरोधी प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं था।
इसके अलावा पुलिस स्टेशनों पर हमलों के दौरान या निजी कारणों से मारे गए कई लोगों को भी मरने वालों की संख्या बढ़ाने के लिए शहीद घोषित किया गया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि अंतरिम सरकार ने UN फैक्ट-फाइंडिंग मिशन को गुमराह करने के लिए गलत जानकारी दी। इस स्कैम का सबसे हैरान करने वाला पहलू कबीर (सीरियल नंबर 204) का मामला है।
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जांच से पता चला कि कबीर असल में बाखर अली था जो रेडिकल ऑर्गनाइज़ेशन लालरू बहिनी का मेंबर था और एक भगोड़ा क्रिमिनल था जिसे मौत की सज़ा मिली थी। बाखर अली 1999 में बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के जाने-माने लीडर काज़ी आरिफ अहमद की हत्या में शामिल था। 5 अगस्त को एक पुलिस स्टेशन पर हमले में उसकी मौत हो गई थी लेकिन उसकी असली पहचान छिपाई गई और उसे जुलाई के शहीदों की लिस्ट में डाल दिया गया।
हद तो तब हो गई जब 5 अगस्त 2025 को उसकी मौत की पहली बरसी पर उपजिला एडमिनिस्ट्रेशन के सीनियर अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने बाखर अली की कब्र पर जाकर फूल चढ़ाए और उसे श्रद्धांजलि दी। इस जांच से पता चलता है कि कैसे एक दोषी क्रिमिनल को पॉलिटिकल फायदे के लिए देश का शहीद दिखाया गया है।
