ट्रेड वार ने तोड़ी चीन की कमर, बिगड़े आर्थिक हालत के आंकड़े देख अमेरिका खुश

2020-01-19T12:15:38.727

इंटरनेशनल डेस्कः हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार खत्‍म हो गया। इसके बाद सामरिक और आर्थिक क्षेत्र में अमेरिका को टक्‍कर देने वाले चीन की आर्थिक हालत को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं वह बहुत चौंकानेे वाले हैं। दरअसल अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार ने ड्रैगन की कमर तोड़ दी है।ट्रेड वार के बाद चीन ने देश के आर्थिक विकास के जो आंकड़े पेश किए उनसे लगता है कि चीन की आर्थिक हालत खस्‍ता है और वह मंदहाली के दौर से गुजर रहा है।  चीन के बिगड़े आर्थिक हालत के आंकड़े देख अमेरिका खुश नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि चीन ने इन आंकड़ों को तब पेश किया है, जब हाल में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार खत्‍म हुआ है। दोनों देशों के बीच एक ट्रेड समझौता हुआ है। ऐसे में अमेरिका ने शायद चीन के आर्थिक विकास की ये रिपोर्ट देख कर राहत की सांस ली हो।

 

3 दशकों में सबसे कम स्‍तर पर पहुंची आर्थिक वृद्धि
बता दें कि संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार ने ड्रैगन की कमर तोड़ दी है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीन की आर्थिक वृद्धि 2019 में लगभग 30 वर्षों में सबसे कम स्‍तर पर है। 1990 के बाद से चीन की अर्थव्‍यस्‍था में यह सबसे धीमी दर है। चीन की पूरे वर्ष वृद्धि दर 6.1 फीसद रही। इसके पूर्व 2018 में यह 6.6 फीसद थी। जानकार इसके लिए अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार को प्रमुख कारण मान रहे हैं।

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एक वर्ष में हर तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटी
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो NBSC के आंकड़ों के अनुसार एक वर्ष में चीन की आर्थिक वृद्धि दर हर तिमाही में घटी है। हर तिमाही रिपोर्ट में यह गिरते हुए क्रम में है। अगर इसकी तुलना वर्ष 2018 से की जाए तो यह वृद्धि दर 6.5 से घटकर 6.0 फीसद पर पहुंच गई है। हाला‍ंकि, साल के शुरुआत में यह महज 0.1 फीसद तक गिरी। लेकिन इसके बाद इसके गिरने का सिलसिला रुका नहीं और वर्ष के अंतिम दो तिमाही में यह महज 6.0 फीसद पर पहुंच गई। इस तरह से साल के अंत में आधा फीसद की गिरावट दर्ज की गई।

 

आधा फीसदी की गिरवाट से ही हिला चीन
अमेरिका और चीन के बीच 2018 से ट्रेड वार चल रही है। चीन की अर्थव्‍यवस्‍था की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है, वृद्धि दर में महज आधा फीसद गिरावट से चीन में कोहराम मचा हुआ है। चीन की अर्थव्‍यस्‍था में आधा फीसदी की गिरावट भी काफी अहम है। बता दें कि चीन दुनिया की सबसे तेज अर्थव्‍यस्‍था में से एक है। चीन की आर्थिक शक्ति होने का अंदाजा लगाया जा सकता है कि व्‍यापार के क्षेत्र में अमेरिका ड्रैगन को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। इसलिए दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर ए‍क शीत युद्ध जैसे हालात रहते हैं।

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ड्रेगन ने आर्थिक विकास की बनाई नई योजना
अमेरिकी ट्रेड वार व दुनिया में आई मंदी से निपटने के लिए चीन ने अपने आर्थिक विकास की एक नई योजना तैयार की है। अर्थशास्त्रियों को उम्‍मीद है कि इस साल चीन की विकास दर 5.9 फसीद रहने का अनुमान है। इस इस साल छह फीसदी आर्थिक विकाद दर का लक्ष्‍य रखा गया है। मंदी को दूर करने के लिए चीन ने अपने बुनियादी ढांचे में खर्च में वृद्धि की है।

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चीन-अमेरिका ट्रेड करार के बाद उम्‍मीदें बढ़ी
2 वर्षों से अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार थमने वाली है। अमेरिका और चीन के बीच पहले चरण का व्यापार समझौता हो गया है। इससे बुधवार को दुनिया के प्रमुख बाजारों में तेजी देखी गई। अमेरिका के व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के उप-प्रधानमंत्री लिउ ही ने समझौते पर दस्तखत किए। इस समझौते के बाद वर्ल्ड स्टॉक इंडेक्स शुरुआती कारोबार में चढ़ गया। इसमें 0.04 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई। जापान सहित एश‍िया-प्रशांत देशों के शेयर भी 0.21 फीसद चढ़ गए।जापान का निक्केई भी 0.14 फीसद की वृद्धि हुई। भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्‍स 130 अंक तक मजबूत होकर 42 हजार के मनोवैज्ञानिक स्‍तर को पार कर लिया।

 

करों में कटौती अच्‍छे संकेत, रियल एस्‍टेट में निवेश बढ़ा
रियल एस्टेट निवेश 2019 में एक साल पहले 9.9 फीसद बढ़ा, जो साल के पहले 11 महीनों में 10.2 फीसद की बढ़त से थोड़ा धीमा था। बीजिंग मौजूदा मंदी के मौसम के लिए राजकोषीय और मौद्रिक कदमों के मिश्रण पर भरोसा कर रहा है, करों में कटौती कर रहा है और स्थानीय सरकारों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भारी मात्रा में बांड बेचने की अनुमति दे रहा है।



 


Tanuja

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