हरियाणा में झींगा उत्पादन ने तोड़े सारे रिकार्ड

punjabkesari.in Friday, Oct 22, 2021 - 08:19 PM (IST)

चंडीगढ़, (अर्चना सेठी)-हरियाणा में झींगा उत्पादन ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। दूसरे राज्यों के मतस्य विभाग हरियाणा के विशेषज्ञों से झींगा उत्पादन के गुर सीख रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो प्रदेश में वर्ष 2020-21 के दौरान 1232.5 हेक्टेयर जमीन पर 3120.00 टन झींगा का उत्पादन किया है। जबकि आने वाले साल 2021-22 में 2800 हेक्टेयर जमीन पर 7000.00 टन झींगा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2014 में झींगा पालन 70 हेक्टेयर जमीन से शुरु किया गया था। तब 140.00 टन झींगा का उत्पादन किया गया था। वर्ष 2015-16 में 170 हेक्टेयर जमीन पर 340 टन, वर्ष  2016-17 में 320 हेक्टेयर जमीन पर640 टन, वर्ष 2017-18 में 945  हेक्टेयर जमीन पर1890 टन, वर्ष 2018-19 में 1027.5 हेक्टेयर जमीन पर2055 टन, वर्ष 2019-20में 1100 हेक्टेयर जमीन पर 2860 टन झींगा उत्पादन किया गया था। मत्सय विभाग ने वर्ष 2021-22 में 2800 हेक्टेयर जमीन पर7000 टन झींगा उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा है। 

 


साठ के दशक में शुरु हुआ था मतस्य उत्पादन
हरियाणा में वर्ष 1966 में 58 हेक्टेयर कामीन पर मछली उत्पादन शुरु किया गया था। 1.5 लाख मछली के बीजों से हर साल 600 टन मछलियां उत्पन्न की गई थी। तत्तकालीन समय में सिर्फ तीन मछली बीज फार्म मौजूद थे जिनमें 1500 के करीब लोग काम करते थे। वर्ष 2020-21 में प्रदेश की 45519.00 एकड़ जमीन पर 2925.31 लाख मछली के बीज और 203160.11 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में खारे पानी की मौजूदगी ने झींगा उत्पादन को बढ़ावा दिया है। वर्ष 2014-15 में प्रदेश की बंजर जमीन पर खड़े खारे पानी में झींगा उत्पादन की शुरुआत की गई थी।  जींद, झज्जर, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, गुरुग्राम, सोनीपत, भिवानी, चरखीदादरी, रोहतक, मेवात, कैथल, फरीदाबाद जिलों में अब झींगा पालन किया जा रहा है। 

 

प्रदेश में मौजूद जमीन व खारे पानी को लेकर किया अध्ययन
हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण, प्रदेश मतस्य विभाग और 405 पंचायतों के अधिकारियों द्बारा सोनीपत, झज्जर, रोहतक और चरखीदादरी में किए गए सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि हरियाणा की 10216.05 एकड़ जमीन में जलभराव और खारे पानी की समस्या है। जबकि 300 से 400 एकड़ जमीन ऐसी है जहां के किसान खारे पानी की मौजूदगी से परेशान हैं। 488 तालाबों में 1002.75 एकड़ जमीन पर मतस्य पालन किया जा रहा है। 14310 एकड़ जमीन पर मौजूद खारे पानी के 126.5 तालाबों में मछली पालन चल रहा है। किसान मछली पालन से एक साल में प्रति एकड़ जमीन से 1.5 लाख रुपये कमाता है जबकि झींगा पालन से चार लाख रुपये प्रति एकड़ की कमाई होती है। झींगा पालन साल में मार्च से लेकर सिर्फ नवंबर महीने के बीच किया जाता है। बाकी के महीनों में किसान पारंपरिक फसलों के उत्पादन का काम भी कर सकते हैं।  

 

झींगा पालन ने दूसरी फसलों काउत्पादन छोड़ा पीछे
फ सल- - - -उत्पादन- - - -- एम.एस.पी.- - - -आय
  --------(क्विंटल/एकड़)---(क्विंटल)- - - -- ---
१.    चावल- - ---14.76- - - ---1868- - -- -27571.68
२.    गेहूं- - - - --12.00- - ----1975- - - ---23700.00
३.    कपास- - ----04.19 - - ---5515- - - --23107.85
४.    मक्का- - - --12.10- - ----1850 - - - --22385.00 
५.    बाजरा- - - --09.40- - ----2150- - - ---20210.00 
६.    झींगा- - -- --24.00- - ----30000- - ---720000.00

 

आने वाले सालों में झींगा उत्पादन क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य
    वर्ष - - - -- - - झींगा पालन क्षेत्र
1. 2021-22 - - --- - 2800 
2. 2022-23- - - ----4000
3. 2023-24- - --- --5000  

झींगा पालन को करेंगे क्षेत्र का विस्तार
हरियाणा के मतस्य विभाग के निदेशक प्रेम सिंह मलिक का कहना है कि प्रदेश में झींगा पालन उद्योग खूब फल फूल रहा है। प्रदेश की ऐसी कामीन जहां ना तो खेतीबाड़ी की जा सकती है और खारा पानी मौजूद है। वहां झींगा पालन कर किसान खूब मुनाफा कमा सकते हैं। हरियाणा में वर्ष 2014 में झींगा पालन शुरु किया गया था और आज प्रदेश के किसान झींगा पालन कर दूसरे राज्यों को बढिय़ा दाम पर झींगा बेच रहे हैं। अगर एक एकड़ जमीन पर किसान झींगा पालन करता है तो किसान को तकरीबन चार लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है। हरियाणा में 11.5 टन झींगा का प्रति हेक्टेयर जमीन में उत्पादन किया जा रहा है। एक किलो झींगा के उत्पादन में किसान का 180 रु के करीब खर्च आता है जबकि उसी झींगा को किसान 450 रुपये से लेकर 500 रुपये में बेच रहे हैं। मलिक ने कहा कि हरियाणा की जमीन पर खारे पानी में झींगा का उत्पादन उसी स्तर का हो रहा है जैसा समुद्री पानी में होता है। झींगा उत्पादन में हरियाणा ने दूसरे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। आने वाले सालों में मतस्य विभाग का लक्ष्य झींगा पालन के क्षेत्र का अधिकाधिक विस्तार करना है। हाल ही में ओड़ीसा से आए विशेषज्ञों के टीम ने हरियाणा के झींगा उत्पादन तालाबों का निरीक्षण किया और कहा कि ओड़ीसा में भी हरियाणा की तर्ज पर झींगा उत्पादन किया जाएगा। 
  
 


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News Editor

Archna Sethi

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