ये 6 लोगों में से आपके जीवन में कोई एक भी इंसान तो...

10/09/2020 4:04:07 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
अक्सर आप ने अपने बड़ों को कहते सुना होगा कि हमेशा अपने आस पास वालों की संगति को अच्छा रखना चाहिए क्योंकि हम से रोज़ाना मिलने वालों का हमारे व्यक्तित्व तथा चरित्र पर पूरा प्रभावित होता है। तो वहीं ये भी कहा जाता है कुछ लोग हमारे मन-मस्तिष्क पर भी गहरा असर डालते हैं। महाभारत काल में धृतराष्ट्र को अपनी नीतियों से सही गलत की पहचान करवाने का प्रयास करने वाले महात्मा विदुर ने इस संदर्भ में बहुत अच्छी बातें बताई हैं। इन्होंने अपने नीति शास्त्र में इससे जुड़ा एक ऐसा श्लोक बताया है कि जिसमें बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति को  अपने जीवन में किन लोगों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए। विदुर ने बताया है कि इन लोगों के जीवन में होने से इंसान के जीवन में हमेशा दुख का कोई न कोई कारण पैदा होता रहताहै। तो अगर आप चाहते है कि आपके जीवन में ऐसा कोई दुख न आए तो आगे बताई नीतियों को अच्छे से समझ लें और अगर आपके आगे बताई लोगों में से कोई एक भी व्यक्ति जीवन में है तो आज हील उनसे दूरी बनाकर रख लें।

तो चलिए सबसे पहले जानते हैं विदुर जी द्वारा बताया गया वो श्लोक-

ईर्ष्यी घृणी न सन्तुष्ट: क्रोधनो नित्यशक्ति:।
परभाग्योपजीवी च षडेते नित्यदु:खिता:।।

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जिस व्यक्ति के जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति होता है जो ईष्यालु हो, वो अपने जीवन में हमेशा दुख पाता। इतना ही नहीं ऐसे लोग जिस किसी के संपर्क में होते हैं उसको भी अपने मन की अस्थिरता बता बता कर परेशान कर देता है। इसलिए विदुर जी ने कहा है कि इन्हें हमेशा अपने जीवन में से दूर रखना चाहिए।

इसके अलावा जो लोग अंजान लोगों के साथ-साथ अपनों से भी घृणा की भावना रखते हैं, उन्हें न तो कभी खुद जीवन में सुख प्राप्त होती है न ही वो अपने साथ वालों को उनके जीवन में आगे बढ़ने देते हैं। ऐसे लोग हमेशा अपने साथ वालों को भी अपनी तरह घृणा करना सीखाते हैं।जिस कारण महात्मा विदुर ने इनसे दूरी बनाकर रखने के लिए कहा है।

जो व्यक्ति सब कुछ पाने के बाद भी कभी अपने अंदर संतोष का भाव पैदा नहीं करता उसे, उस व्यक्ति के आस पास रहने वाला व्यक्ति नकारात्मकता के भावों से भर जाता है। जिस कारण वो दूसरों के दुख का करण बनता है।
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क्रोध को लेकर सनातन धर्म के लगभग हर शास्त्र व ग्रंथ में कहा गया है कि क्रोध करने वाला व्यक्ति कभी जीवन में अच्छे संबंध नहीं बना पाता। इसका कारण होता है क्रोध में निकले हुए अपशब्द या हमारी कटु वाणी। विदुर जी कहते हैं जिन लोगों में अधिकतर क्रोध होता है वो अपने जीवन में हमेशा दुखी रहती हैं। बल्कि ऐसे लोगों के साथ कोई व्यक्ति किसी प्रकार का रिश्ता बनाना पसंद नहीं करता।

जो लोगो गैरों के साथ-साथ अपनों पर भी हमेशा किसी न किसी बात को लेकर शंका करते रहते हैं, उनके जीवन में सुख के पल बहुत कम होते हैं। क्योंकि वेह हर समय दूसरों पर शक करते हुए हमेशा नैगेटिव बातों सोचते रहते हैं और दुखी रहते हैं। इसलिए महात्मा विदुर ने कहा है कि ऐसे लोगों से जितनी हो सके दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

आखिर में बारी आती है उन लोगों की, जो दूसरों के सहारे रहना पसंद करते हैं। उनके जीवन में सुख से ज्यादा दुथ रहता है। क्योंकि वे हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पंसद करते हैं, इसलिए जितना हो सके ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए क्योंकि ये लोग कभी मौका का फायदा उठाकर आपके ऊपर निर्भर हो सकते हैं।
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Jyoti

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