स्वामी विवेकानंद की बहादुरी ये किस्सा देता है बहुत बड़ी सीख

10/15/2021 11:16:38 AM

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नरेन्द्र की आयु 6 वर्ष की थी। अपने मित्रों के साथ वह मेले में गया। मेले में से नरेन्द्र ने एक शिव जी की मूर्ति खरीदी। मेले में समय कब बीत गया पता ही नहीं चला, संध्या हुई, अंधेरा छाने लगा तब नरेन्द्र तथा सभी मित्र घर की ओर जाने लगे।

नरेन्द्र एक हाथ में मूर्ति लिए अपने मित्रों के आगे-आगे चल रहा था, पर उनमें से एक मित्र कुछ पीछे रह गया था। अचानक नरेन्द्र ने उसे मुड़ कर देखा कि एक घोड़ागाड़ी उस मित्र की तरफ तेज गति से आ रही है, टक्कर निश्चित जान पड़ रही थी पर ऐसी स्थिति में भी नरेन्द्र घबराया नहीं, वह एक हाथ में शिव जी की मूर्ति लिए ही एकदम से दौड़ पड़ा। देखने वाले चीखे, ‘‘अरे। गया, अरे गया’’ पर ऐन मौके पर नरेन्द्र ने मित्र का हाथ पकड़ कर एक ओर खींच लिया।

छोटे लड़के की बहादुरी देखकर सभी दंग रह गए। नरेन्द्र ने घर जाकर जब मां को यह बात बताई तब मां ने उसे अपने दिल से लगा कर कहा कि, ‘‘मेरे बेटे। आज तूने एक बहादुरी का काम किया है। ऐसे कार्य हमेशा ही करते रहना। तेरे ऐसे काम से मुझे बहुत प्रसन्नता होगी और यही सच्ची शिव पूजा है।’’ 

यही आगे चल कर स्वामी विवेकानंद के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हुए।
 


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Content Writer

Jyoti

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