इस साल नवरात्रि में किस शाही सवारी पर आएंगी देवी दुर्गा, जानें सिर्फ यहां

2020-09-21T13:52:29.02

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
जैसे कि आप सब अब तक जान ही चुके हैं कि इस बार अधिम मास की वजह से देवी दुर्गा का सबसे प्रमुख कहे जाने वाला नवरात्रि का पर्व देर से यानि 17 अक्टूबर को आएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर बार नवरात्रि के दौरान जब भी मां अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाने आती है तो खास सवारी करती हैं। हम जानते हैं आपको दिमाग में यकीनन ये प्रश्न चल रहा होगा, कि इस बार मां किसकी सवारी करेंगी। तो चलिए आपको बताते हैं इस बार मां दुर्गा किसकी सवारी करेंगी यानि किस पर बैठकर धरती पर अपने भक्तों को उनकी परेशानियों से निजात दिलवाने आएंगी। 
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शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि पर मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व होता है। देवीभागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का आगमन भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। हर साल नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं और उसका अलग-अलग महत्व होता है।

अगर नवरात्रि का आरंभ सोमवार या रविवार के दिन होता है तब इसका अर्थ होता है माता हाथी पर सवार होकर आएंगी।

अगर शनिवार और मंगलवार के दिन नवरात्रि का पहला दिन होता है तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं।

वहीं गुरुवार या शुक्रवार के दिन नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर मां का आगमन होता तो माता डोली की सवारी करते हुए भक्तों को आशीर्वाद देने आती हैं।

बुधवार के दिन नवरात्रि का पहला दिन होने पर माता नाव की सवारी करते हुए धरती पर आती हैं।

बता दें कि इस बार 17 अक्टूबर को शनिवार है इसलिए मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार जब माता दुर्गा नवरात्रि पर घोड़े की सवारी करते हुए आती हैं तब पड़ोसी से युद्ध, गृह युद्ध, आंधी-तूफान और सत्ता में उथल-पुथल जैसी गतिविधियां बढ़ने की संभावना रहती है।

जानकारी के लिए बता दें कि नवरात्रि के आरंभ से ही शुभ कार्यों की शुरूआत हो जाएगी। क्योंकि मलमास में हर तरह का शुभ काम वर्जित होता है। लेकिन नवरात्रि के साथ ही सभी काम शुरू हो जाएंगे। नवरात्रि आरंभ होते ही नई वस्तुओं की खरीद, मुंडन कार्य, ग्रह प्रवेश जैसे शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे। हालांकि शादी विवाह देवउठनी एकादशी तिथि के बाद ही आरंभ होंगे।

चलिए अब आपको बताते हैं कि कौन से दिन मां के किस रूप की आराधना करनी है-
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17 अक्टूबर पहले दिन घटस्थापना होगी।

18 अक्टूबर दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी।

19 अक्टूबर को तृतीया पर मां चंद्रघंटा की पूजा होगी।

20 अक्टूबर को चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होगी।

21 अक्टूबर को पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होगी।

22 अक्टूबर को छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होगी।

23 अक्टूबर को सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होगी।

24 अक्टूबर को आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होगी, दुर्गा महा नवमी मनाई जाएगी और दुर्गा महाअष्टमी पूजा भी होगी।

25 अक्टूबर को अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी और नवरात्रि का पारण किया जाएगा। इसके अलावा विजय दशमी भी मनाई जाएगी।

नवरात्रि तिथि दिन पूजा 
17 अक्टूबर
 
पहला दिन प्रतिपदा घटस्थापना
18 अक्टूबर द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर  
तृतीय मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर  
चतुर्थी मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर  
पंचमी मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर  
षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर  
सप्तमी मां कालरात्रि पूजा
 
24 अक्टूबर  
अष्टमी मां महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा दुर्गा महाअष्टमी पूजा
25 अक्टूबर  
नवमी मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारण विजय दशमी

 


Jyoti

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