शरद पूर्णिमा 2021: चंद्रमा के आशीर्वाद से प्राप्त होती है निरोगी काया

10/19/2021 1:39:25 PM

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ज्योतिष के अनुसार अश्विन शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली पूर्णिमा पर चंद्रमा, पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होने से सोलह कला संपूर्ण होता है। चंद्रकिरणों में अमृत का निवास रहता है, अत: उसकी रश्मियों से अमृत और आरोग्य की प्रप्ति होती है। मान्यता है कि इस रात, ऐसे मुहूर्त में, चंद्र किरणों में कुछ रासायनिक तत्व, मौजूद होते हैं जो शरीर को बल प्रदान करते हैं, निरोग बनाते हैं तथा संतान प्राप्ति में सहायक होते हैं। इस पूर्णिमा पर लक्ष्मी जी की आराधना की जाती है।

शुभ समय : 19 अक्तूबर को पूर्णिमा तिथि आरंभ- सायं : 7 बजकर 4 मिनट पर
20 अक्तूबर को पूर्णिमा तिथि समाप्त- सायं : 08 बजकर 30 मिनट पर

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहा है। जो धन-समृद्धि में बढ़ोतरी देकर जाने वाला है। इस दिन कोजागर व्रत जिसे कौमुदी व्रत भी कहते हैं, रखा जाता है। शरद पूर्णिमा पर सभी पौष्टिक मेवों सहित गाय के दूध में खीर बना कर खुले स्थान पर रात्रि में ऐसे सुरक्षित रखें कि कोई पशु-पक्षी इसे खा न सके और पूरी रात चंद्र किरणें अपना अमृत इस पर बिखेरती रहें। इस खीर के पात्र को किसी तार पर बांध कर जमीन से ऊंचा लटका सकते हैं ताकि कीड़े, चींटियां या बिल्ली आदि इसमें मुंह न लगा सकें। यह खीर रिश्तों की कड़वाहट समाप्त कर, मिठास घोलने मे उतनी ही सक्षम है जितनी भगवान श्री कृष्ण की रासलीला के समय थी।

मान्यता है कि इसी पूर्णिमा पर भगवान कृष्ण ने मुरली वादन करके यमुना तट पर गोपियों के साथ रास रचाया था। इसी आश्विन पूर्णिमा से कार्तिकेय स्नान आरंभ होंगे। काॢतक मास में काॢतक महातम्य का पाठ करना या सुनना चाहिए। रात्रि में मां लक्ष्मी की षोडशोपचार विधि से पूजा करके ‘श्रीसूक्त’ का पाठ, ‘कनकधारा स्तोत्र’, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अथवा भगवान् कृष्ण का ‘मधुराष्टकं’ का पाठ  ईष्ट कार्यों की सिद्धि दिलाता है।  —मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य  
 


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Content Writer

Jyoti

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