अद्भुत संयोग में है शनि जयंती, इस तरह करें शनिदेव को प्रसन्न

06/04/2021 5:14:02 PM

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इस बार भी 10 जून को जयेष्ठ अमावस्या के दिन एक अद्भुत संयोग बनने जा रहा है, जिसे आप दुर्लभ संयोग भी कह सकते हैं। माना जाता है ऐसा संयोग अमूमन सदियों बाद बनता है। इसके अलावा इस दिनशनि जयंती पर वट सावित्री व्रत भी है, अमावस्या भी है जिसे शनिचरी अमावस्या कहा जाता है और साथ ही इस दिन सूर्य ग्रहण भी है। ये चारों ही संयोग ज्योतिष की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण  हैं। खास बात यह भी है कि 10 जून को शनि जयंती राेहिणी नक्षत्र में मनाई जाएगी। आकाश मंडल के 27 नक्षत्रों में से रोहिणी नक्षत्र चौथा नक्षत्र है। रोहिणी नक्षत्र का राशि स्वामी शुक्र है और नक्षत्र स्वामी चन्द्रमा है। ज्योतिष में इस नक्षत्र को बहुत पवित्र माना जाता है। यानि शनि जयंती बहुत ही शुभ नक्षत्र में पड़ रही है। ग्रह गोचर के हिसाब से बात करें तो उस समय  मंगल कर्क राशि में , राहु, बुध , सूर्य व चंद्रमा वृषभ राशि में, शुक्र मिथुन राशि में,  देव गुरु बृहस्पति कुंभ राशि में, शनि मकर राशि में व केतु वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे होंगे। इसके अलावा महत्वपूर्ण यह भी है कि शनि वक्री अवस्था में होंगे।

अमावस्या तिथि 9 जून को दोपहर 1:57 बजे से प्रारम्भ होकर 10 जून शाम 4:21 बजे समाप्त होगी। इस दिन दान पुण्य व पूजा-पाठ का विशेष महत्व रहेगा । भगवान शनिदेव को प्रसन्न करने का यह सबसे महत्वपूर्ण व सबसे शुभ दिन भी है। भगवान सूर्य व माता छाया के पुत्र शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या को हुआ था और इसीलिए इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है। पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि जो लोग अच्छे कर्म करते हैं, उन्हें शनि राजा बना देता है और जो बुरे कर्म करते है उन्हें राजा से रंक बना देता है। शनिदेव की पूजा करने से उनके निमित्त उपाय करने से शनिदेव बहुत जल्दी खुश होते हैं, साथ ही जन्म पत्रिका में अशुभ शनि के प्रभाव से होने वाली परेशानियों, जैसे शनि की साढे-साती, ढैय्या और कालसर्प योग से भी छुटकारा मिलता है। ऐसी मान्यता भी है कि शनि जयंती के दिन किया गया दान-पुण्य और पूजा पाठ शनि संबंधित सभी कष्टों को दूर करने में सहायक होता है। 

यहां जानें शनि जयंती पर शनिदेव से जुड़ी पूजा विधि जिससे दूर होंगे आपके सारे कष्ट- 
शनि जयंती के दिन सुबह उठकर नित्यकर्म और स्नानादि करने के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। घर में पूजा स्थल पर शनिदेव की मूर्ति स्थापित कर उस पर तेल, फूल, माला आदि चढ़ाएं। यदि प्रतिमा या तस्वीर न भी हो तो  लकड़ी के एक टुकडे में साफ काले रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर एक सुपारी के दोनों और शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाएं। इसके पश्चात धूप जलाएं। फिर इस स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवाएं। सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल शनिदेव को अर्पित करें। तेल से बने पदार्थ अर्पित करें। 

शनिदेव को काला उड़द और तिल का तेल चढ़ाना बहुत शुभ होता है। इसके बाद तेल का दीपक जलाएं और शनि चालीसा का पाठ करें। अब आरती करने के बाद हाथ जोड़कर प्रणाम करें। उसके बाद प्रसाद का वितरण करें। इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को सुंदर भोजन कराएं तथा सामर्थ्य के अनुसार दान- पुण्य करें। जिन जातकों को साढ़े साती चल रही है, उन्हें शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल, उड़द, काली मिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। 

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। शनि के लिए दान में दी जाने वाली वस्तुओं में काले कपड़े, जामुन, काली उड़द, काले जूते, तिल, लोहा, तेल, आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान में दे सकते हैं।

शनि जयंती के दिन शनि मंत्र-  ॐ शं शनैश्चराय नमः के जप से शनि देव प्रसन्न होते हैं। यह जाप कम से कम 11 माला का होना चाहिए। जाप शुरू करने से पहले तेल का दीपक अवश्य जलाएं तथा मुख दक्षिण दिशा में करें।

गुरमीत बेदी 
gurmitbedi@gmail.com 


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Content Writer

Jyoti

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