शनि जयंती 2020: अपराजिता के फूल व ये मंत्र है शनि देव की अधिक प्रिय

05/16/2020 3:11:32 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
यूं तो हर शनिवार शनि देव की पूजा की जाती है परंतु इनमें से कुछ खास दिन ऐसे भी होते हैं जिस दिन अगर इनकी पूजा की जाए तो इनकी अपार कृपा प्राप्त होती है। अब यकीनन आप सोचेंगे कि वो दिन कौन से होते हैं। तो बता दें इनमें से जो सबसे विशेष दिन माना जाता है वो है शनि जयंती का। बता दें इस बार शनि जयंती 22 मई को पड़ रही है। हिंदू धर्म में इस दिन का अधिक महत्व है। लोग देश दुनिया के तमाम प्रसिद्ध मंदिर आदि में जाते हैं और वहां जाकर विधि वत शनि देव की पूजा करते है। मगर फिलहाल पूरी दुनिया के जो मौजूदा हालात है उस दौरान हर कोई कोरोना महामारी से बचते हुए अपने घरों में ही रहकर पूजा पाठ करना पसंद करेंगे। इसी बीच हम अपनी वेबसाइट के माध्यम से उन तक शनि देव से जुड़े ऐसे उपाय बताएंगे जो आपके लिए लाभदायक साबित होंगे। तो चलिए बताते हैं आपके शनि देव से संबंधित खास व चमत्कारी उपाय-
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वैसे तो न्याय के देवता शनि देव प्रत्येक इंसान को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं परंतु कहा जाता है अगर आगे दिए गए इनसे जुड़े खास उपाय कर लिए जाएं तो इनके बुरे प्रभाव से जल्दी छुटकारा मिल जाता है तो वहीं इसके साथ ही जिन पर शनि देव पहले से प्रसन्न होते हैं उन पर वो अपनी दौगुनी कृपा प्राप्त होती है।

बता दें अगर संभव हो तो ये उपाय शनि मंदिर में कर लें, अन्यथा अपने घर में ही कर सकते हैं। ये हैं उपाय-

शनि जयंती के दिन मंदिर में या घर में ही शनि प्रतिमा के समक्ष नीले रंग के 5 फूल एवं काले तिल के 21 दाने सुबह के समय चढ़ा दें, इससे शनि देव प पर जल्दी ही प्रसन्न होंगे और जो भी आपकी मनोकामनाएं होंगी पूरी करेंगे।  
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इसके अलावा शनि जयंती के दिन सुबह शाम शनि देव का ध्यान करते हुए निम्न शनि मंत्र का जप 108 बार जप ज़रूर करें।

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:
।।

बता दें शनि देव को नीले फूल और काले तिल सबसे अधिक प्रिय है। इसीलिए ज्योतिष शास्त्र में इन्हें अपराजिता के फूल चढ़ाने को कहा जाता है। तथा शनि के कारक ताले दिल अर्पित करने की हिदायत दी जाती है।
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Content Writer

Jyoti

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