क्या आप जानते हैं कैसे और कब शुरू हुआ रामलीला मंचन का आयोजन

10/2/2019 1:00:30 PM

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आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि शुरू होते ही देश के लगभग हर हिस्से से दशहरे के तैयारियों शुरू हो जाती हैं। जिसमें रामलीला का सबसे अधिक महत्व है। देश में लगभग हर जगह रामलीला का आयोजन होता है। बता दें रामलीला का ये आयोजन शारदीय नवरात्रि के दौरान किया जाता है। रामलीला के आयोजन की ये परंपरा कोई आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है। यहां तक कि ये परंपरा न केवल भारत देश में बल्कि कई अनेक देशों में प्रचलित है। मगर आख़िर इस परपंरा की शुरुआत हुई कैसे और किसने की इस बार में आज भी आप में से बहुत से लोग अंजान होंगे। तो अगर आप भी इसके बारे में जानने की चाह रखते हैं तो चलिए हम आपको बताते हैं इससे जुड़ी खास जानकारी। 
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सदियों से चली आ रही है ये परपंरा
बता दें रामलीला मंचन लोक-नाटक का एक रूप है। बताया ता है इस परंपरा की शुरुआत उत्तर भारत से हुई जिसके कई सबूत 11 वीं शताब्दी में मिलते हैं। कहा जाता है शुरुआती दौर में रामलीला मंचन महर्षि वाल्मीकि के महाकाव्य रामायण की पौराणिक कथा पर आधारित था, परंतु अब इसकी पटकथा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ पर आधारित है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार 16 वीं सदी में तुलसीदास के शिष्यों नें रामलीला का मंचन करना प्रारंभ किया था। कहा जाता है कि उस समय जब गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस पूरी करी थी तब काशी के नरेश ने रामनगर में रामलीला मंचन कराने का संकल्प लिया था। जिसके बाद से देशभर में रामलीला का मंचन प्रारंभ हो गया।
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विदेशों में भी होता है रामलीला मंचन
आज के समय में भी रामलीला ने केवल अपने देश भारत में ही बल्कि बाली, जावा, श्रीलंका जैसे देशों में भी प्राचीन काल से ही किसी न किसी रूप में प्रचलित रही है। रामलीला का मंचन नेपाल, थाईलैंड, लाओस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, सूरीनाम, मॉरीशस में भी होता है। थाईलैंड में रामायण को रामाकिआन कहते हैं। कहा जाता है इन दिनों रामलीला का मंचन देखने तो सभी जाते हैं, परंतु बहुत कम लोगों को ही यह जानकारी होगी की इसका मंचन क्यों किया जाता है।

दशमी को किया जाता है रावण-वध
धार्मिक मान्यताओ के अनुसार नवरात्रि में दुर्गा मां के पूजन के साथ ही नौ दिन चलने वाली रामलीला के मंचन का भी शुभारंभ हो जाता है। जिसके माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन की घटनाओं को दर्शाया जाता है। दशमी को रावण-वध के साथ मंचन का समापन होता है जिसके बाद जगह-जगह रावण के पुतले जलाएं जाते हैं।
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Jyoti

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