Panchak 2022: पंचक में ये काम करने से मिलते हैं ढेरों लाभ

punjabkesari.in Monday, Feb 28, 2022 - 09:20 AM (IST)

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Panchak 2022: हमारी सबसे प्राचीन सनातन सभ्यता में प्रत्येक कार्य मुहूर्त देखकर किया जाता है ताकि वह कार्य निर्विध्न पूरा हो सके। जब भी कोई कार्य किया जाता है तो मुहूर्त में सबसे पहले पंचक पर विचार किया जाता है। कुल 27 नक्षत्रों में से अंतिम के पांच नक्षत्र घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती होते हैं। एक नक्षत्र एक दिन ही रहता है, इस कारण इन पांच नक्षत्रों के पांच दिनों को ही पंचक कहा जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो - जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि के मध्य होता है तो वह समय पंचक कहलाता है। इन पांचों नक्षत्रों को दूषित माना जाता है। इस दौरान कोई भी अशुभ कार्य होता है तो माना जाता है कि वह पांच बार कोई बुरी सूचना मिल सकती है। पंचक की वैलेडिटी अगले पंचक आरम्भ होने तक होती है यानि कि एक महीना। माना जाता है कि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु होती है तो घर के पांच सदस्यों पर कोई न कोई संकट बना रहता है। 

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Panchak 2022 march date and time: इस वर्ष मार्च 2022 में यह पंचक का समय, 1 मार्च 2022 मंगलवार को सांयकाल 4 बजकर 32 मिनट से 6 मार्च 2022 रविवार को प्रातः 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। अलग-अलग दिन आरम्भ होने वाले पंचकों का कुछ विशेष प्रभाव रहता है। इस बार यह पंचक काल मंगलवार से आरम्भ होगा, जिस कारण यह पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट-कचहरी और किसी भी प्रकार के विवाद आदि के फैसले, अपना अधिकार प्राप्त करने वाले काम भी किये जा सकते हैं। इस पंचक में अग्नि, बिजली उपकरणों से नुकसान होने का भय रहता है। इस पंचक के दौरान किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य, औजार, मशीनरी इत्यादि कामों की शुरूआत करना अशुभ माना जाता है।

What is prohibited in Panchak: पंचक सबसे दूषित दिन होने के कारण पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए क्योंकि दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है और यम मृत्यु के देवता हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी उर्जा का प्रवाह नॉर्थ से साउथ पॉल की तरफ ही होता है। किसी भी प्रकार का फर्नीचर खरीदना या रिपेयर करवाना हो तो इस समय यह कार्य वर्जित हैं। पंचक के दौरान घर की छत यानि कि लंटर इत्यादि नहीं डलवाना चाहिए। किसी प्रकार के ईंधन का भंडारण भी वर्जित है।

Panchak: पंचक के दौरान हम कौन-कौन से कार्य कर सकते हैं। गृह प्रवेश, वाहन खरीदारी, भवन का रजिस्टरेशन, मुंडन इत्यादि। अगर हम व्यावहारिक रूप से पंचक काल को समझने का प्रयास करें तो पंचक काल रिपीटेशन का कारक होता है। किसी भी घटना का रिपीट होना सुख की अनुभूति भी दे सकता है और दुख की भी। यहां पर सुख का अभिप्राय आराम से नहीं बल्कि तरक्की या आगे की तरफ उन्नति करने से है, दुख की अनुभूति भी प्राय: नुकसान या मानसिक परेशानी से नहीं है। दुख से अभिप्राय अगर किसी ऐसे कार्य की अनुभूति जो आपको मानसिक, शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक, वैचारिक, व्यावहारिक तौर पर दूसरों से अलग कर दे और आप सामर्थयवान होते हुए भी लाचार हो जाएं वही दुख की अनुभूति समझी जाती है, जहां पर सर्वात सामर्थ्यवान होते हुए भी आप लाचार हो जाएं वही ही दुख की परम अनुभूति होती है। 

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Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM)

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Content Writer

Niyati Bhandari

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