Makar Sankranti 2020: यहां लगता है माघ महीने में मेला, स्नान करने से मिलता है पुण्य

punjabkesari.in Thursday, Jan 09, 2020 - 03:55 PM (IST)

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हिंदू धर्म में हर पर्व का अपना एक खास महत्व होता है। वहीं हर माह में आनी वाली संक्रांति तिथि में दान का महत्व होता है। किंतु माघ माह में आने वाली संक्रांति तिथि की अपनी अलग पहचान होती है, इसे मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस साल ये दिन 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस पुण्‍य अवसर स्‍नान, दान और ध्‍यान का विशेष महत्‍व होता है। इस दिन स्‍नान के लिए यूं तो देश भर में कई प्रमुख तीर्थ स्‍थल विख्यात हैं, लेकिन इन सबमें सर्वाधिक महत्‍व गंगासागर का माना जाता है। 
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ये स्थान बर्फ से ढके हिमालय से आरंभ होकर गंगा नदी धरती पर नीचे उतरती है और हरिद्वार से होती हुई मैदानी स्थानों पर पहुंचती है। जोकि क्रमशः आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश के बनारस, प्रयाग से प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में मिल जाती हैं। यहीं पवित्र पावनी गंगा नदी सागर से मिल जाती है। इस जगह को गंगासागर यानि ‘सागर द्वीप’ कहा जाता है और यह पश्चिम बंगाल में स्थित है। 

मकर संक्रांति के दिन लाखों हिंदू तीर्थयात्री यहां पर डुबकी लगाने के लिए इकट्ठा होते हैं और कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। पुराणों में गंगा सागर की उत्‍पत्ति के पीछे एक कथा के बारे में बताया गया है, जिसके अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के 60 हजार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी। उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए और गंगा यहीं सागर से मिली थीं। मान्यता है कि, गंगासागर की पवित्र तीर्थयात्रा सैकड़ों तीर्थ यात्राओं के समान है। शायद इसलिए ही कहा जाता है कि “हर तीर्थ बार–बार, गंगासागर एक बार।”
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यहां मकर संक्रांति के अवसर पर स्‍नान करने देश ही नहीं विदेश से भी लोग आते हैं। मान्‍यता है कि एक बार गंगासागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गाय दान करने के समान फल मिलता है। स्‍नान के बाद श्रद्धालु यहां स्थित भगवान विष्‍णु के अवतार माने जाने वाले कपिलमुनि के मंदिर में दर्शन करते हैं।
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यहां आए श्रद्धालु संगम पर समुद्र देवता को नारियल अर्पित करते हैं और साथ ही गऊदान भी करते हैं। कहते हैं मृत्‍यु के बाद भवसागर को पार करने के लिए आत्‍मा को गौ की पूंछ का ही सहारा लेना पड़ता है, तभी मोक्ष मिलता है। मान्‍यता है कि जो कुंवारे युवक और युवतियां यहां आकर मकर संक्रांति के अवसर पर गंगासागर में स्‍नान करते हैं, उन्‍हें फलस्‍वरूप मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।


 


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