गुप्त काल में बनाया गया था मां का ये प्राचीन मंदिर, क्या आप जानते हैं?

punjabkesari.in Sunday, Mar 20, 2022 - 11:29 AM (IST)

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हमारे देश में विभिन्न जगहों पर विभिन्न प्रकार के हिंदू मंदिर स्थित है। बताया जाता है हर मंदिर से कोई न कोई इतिहास, पौराणिक गाथा व रहस्य जुड़े होते हैं, जो इन्हें खास बनाते हैं। हमेशा की तरह आज फिर हम आपको ऐसे ही 3 मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका रहस्य उनकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण है। बता दें यहां हम आपको तीन ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपनी वास्तुकला के लिए अधिक प्रसिद्ध है। हालांकि इनका आपस में कोई संबंध नहीं है। तो चलिए बिना देर करते हुए जानते हैं भारत में स्थित ये तीन प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में- 

इसी कड़ी में सबसे पहले बात करते हैं मुंडेश्वरी भवानी मंदिर के बारे में-

‘गुप्त काल’ में बना प्राचीन मंदिर
मुंडेश्वरी भवानी मंदिर बिहार के कैमूर जिले की पंवरा पहाड़ी के शिखर पर स्थित है जिसकी ऊंचाई लगभग 600 फुट है। पुरातत्वादियों के अनुसार यहां से प्राप्त शिलालेख 389 ईस्वी के बीच का है जो इसकी पुरानता को दर्शाता है। मंदिर की नक्काशी और मूर्तियां गुप्त कालीन वास्तुशिल्प में बनी हैं। यह पत्थरों से बना अष्टकोणीय मंदिर है जिसके पूर्वी खंड में देवी मुंडेश्वरी देवी की प्राचीन मूर्ति मुख्य आकर्षण का केंद्र है। मां वाराही रूप में विराजमान हैं। यहां बलि में बकरा तो चढ़ाया जाता है परन्तु उसका वध नहीं किया जाता।
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आप में से बहुत से लोग कैलाश पर्वत से अवगत होंगे, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि भारत में कोई ऐसा भी मंदिर है जो शिव जी के कैलाश पर्वत जैसा दिखता है, अगर नहीं तो जानिए यहां 

शिव जी के ‘कैलाश पर्वत’ जैसा मंदिर
भारत के मंदिरों की वास्तुकला कुछ ऐसी है कि आज भी नवीन तकनीक और विज्ञान की सुविधाओं के बाद भी इस प्रकार की वास्तुकला को हकीकत में उतार पाना बेहद मुश्किल है। ऐसा ही एक मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद की एलोरा गुफाओं में स्थित है। एलोरा के कैलाश मंदिर को बनाने में मात्र 18 वर्षों का समय लगा। मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम ने सन् 756 से 773 के दौरान किया। शिव जी का निवास माने जाने वाले कैलाश पर्वत के आकार जैसे मंदिर का निर्माण किया गया है। खास बात है कि 276 फुट लम्बे और 154 फुट चौड़े इस मंदिर को एक ही चट्टान को तराश कर बनाया गया जिसका वजन लगभग 40,000 टन है।

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आखिर में बात करते हैं एक ऐसे मंदिर की, जो हिंदू धर्म के प्रमुख 5 तत्वों पर आधारित है। जी हां, हमारे देश में न केवल देवी-देवताओं बल्कि हिंदू तत्वों पर आधारित धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। जानिए आगे कहां है ये मंदिर- 

5 तत्वों पर आधारित मंदिर 
तमिलनाडु के तिरुवन्नमलाई में अरुणाचल पर्वत पर स्थित अरुणाचलेश्वर मंदिर जीवन के 5 बुनियादी तत्वों पृथ्वी, अग्रि, जल, वायु और आकाश का प्रतिनिधित्व करता है। यह सबसे पवित्र शैव मंदिरों में से एक है। शिव पुराण के अनुसार 4 सबसे पवित्र स्थान हैं जहां कोई मुक्ति या मोक्ष प्राप्त कर सकता है, उनमें से यह मंदिर एक है। यह 25 एकड़ क्षेत्र में फैला और लगभग 1000 साल पुराना है। 

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Content Writer

Jyoti

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