इस स्पेशल विधि से करें मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न और पाएं मनचाहा वरदान

2020-03-26T10:23:19.11

जैसे कि सब जानते हैं कि आज नवरात्रि का दूसरा दिन है और इस दिन मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को अपने कार्य में सदैव विजय प्राप्त होता है। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी दुष्टों को सन्मार्ग दिखाने वाली हैं। इनकी भक्ति से व्यक्ति में तप की शक्ति, त्याग, सदाचार, संयम और वैराग्य जैसे गुणों में वृद्धि होती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, इनकी व्रत कथा के बारे में विस्तार से।
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पूजा मुहूर्त
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का प्रारंभ 25 मार्च दिन बुधवार को शाम 05 बजकर 26 मिनट से हो रहा है, जो 26 मार्च दिन गुरुवार को शाम 07 बजकर 53 मिनट तक है। ऐसे में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा गुरुवार सुबह करें।

मां ब्रह्मचारिणी पूजन विधि 
चैत्र शुक्ल द्वितीया को आप स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। उसके बाद मां ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा करें। 
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माता को अक्षत्, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प आदि अर्पित करें। इसके पश्चात कपूर या गाय के घी से दीपक जलाकर मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें। मां ब्रह्मचारिणी को चमेली का फूल प्रिय है, पूजा में अर्पित करें। 

मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और मिश्री पसंद है, इसलिए उन्‍हें चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग चढ़ाएं। माता को दूध से बने व्‍यंजन भी अतिप्रिय हैं, कोई भी दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं और मनचाहा वरदान पाएं। 
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व्रत कथा 
मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया, ताकि वे भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा। भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाए तथा 100 वर्ष तक शाक खाकर जीवित रहीं। कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया। उनक तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है। आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगा। भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे।


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