कार्तिक मास में करें इसे स्तुति का पाठ, देवी लक्ष्मी करेंगी धन की वर्षा

10/22/2021 4:40:02 PM

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लगभग लोग जानते हैं कि कार्तिक मास में श्री हरि विष्णु का प्रिय है, इसीलिए इस मास में लोग बढ़ चढ़कर विष्णु जी की पूजा करते हैं। चूंकि इसके अलावा इस मास में तुलसी माता का विवाह संपन्न होता है इसलिए इस मास में तुलसी माता और शालिग्राम की विधि वत पूजा अर्चना की जाती है। परंतु बहुत कम लोग जानते हैं इस मास में जितनी लाभदायक होती है श्री हरि की पूजा उतनी ही शुभदायी होती हैं देवी लक्ष्मी की आराधना। खासतौर पर कार्तिक मास में आने वाले प्रत्येक शुक्रवार को अगर देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाए तो बहुत लाभ मिलता है। बता दें कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है, जिस दौरान देवी लक्ष्मी की आराधना करने का विधान है। इस दिन इनकी पूजा करने से धन की कमी दूर होती है। 

मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी या महालक्ष्मी की पूजा शुक्रवार, महालक्ष्मी व्रत या दीपावली के दिन की जाती है। यहां पर जानें मां लक्ष्मी की पूजा के समय किस स्तुति का पाठ करना चाहिए- 

महालक्ष्मी स्तु‍ति-
आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि। यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।1।। 
सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि। पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।2।।

विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि। विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।3।।
धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि। धनं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।4।।

धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते। धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।5।।
मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि। प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।6।।

गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि। अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।7।।
धीर लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्ति स्वरूपिणि। वीर्यं देहि बलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।8।।

जय लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व कार्य जयप्रदे। जयं देहि शुभं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।9।।
भाग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्य विवर्धिनि। भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।10।।

कीर्ति लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्ष स्थल स्थिते। कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।11।।
आरोग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व रोग निवारणि। आयुर्देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।12।।

सिद्ध लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व सिद्धि प्रदायिनि। सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।13।।
सौन्दर्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कार शोभिते। रूपं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।14।।

साम्राज्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि। मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।15।।
मङ्गले मङ्गलाधारे माङ्गल्ये मङ्गल प्रदे। मङ्गलार्थं मङ्गलेशि माङ्गल्यं देहि मे सदा।।16।।

सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्रयम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तुते।।17।।
शुभं भवतु कल्याणी आयुरारोग्य सम्पदाम्।

।। इति लक्ष्मी स्तुति संपूर्णम ।।

ज्योतिष शास्त्री बताते हैं कि खासतौर पर दिवाली के दिन इस स्तुति का पाठ करने से घर के सदस्यों के जीवन में धन संबंधी परेशानियां खत्म होती हैं तथा जीवन में बरकत के साथ-साथ सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। 


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Content Writer

Jyoti

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