Dharmik Sthal: हिमाचल प्रदेश में है ये प्राचीन ‘नदियां’

2021-09-15T15:24:44.13

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सनातन धर्म के ग्रंथों में देवीे-देवताओं के अलावा कई अन्य चीज़ों का वर्णन मिलता है। इन्हीं में से काफी हद तक नदियों का वर्णन किया गया है। जिस में आज हम बात करने वाले हैं हिमाचल प्रदेश में बहने वाली नदियों के बारे में। बताया जाता है हिमाचल प्रदेश में बहने वाली 5 में से 4 नदियों का ऋग्वेद में उल्लेख मिलता है। प्राचीन समय में इन नदियों को अन्य नामों से जाना जाता था। चिनाब को अरिकरी कहा जाता था जो प्रदेश में 120 कि.मी. लम्बा रास्ता तय करती है। 

लाहौल क्षेत्र में चंद्रा तथा भागा नदियां तांदी में मिलती हैं जो चिनाब के नाम से जानी जाती है। रावी (पुरुष्णी) धौलाधार शृंखला की एक शाखा बड़ा भंगाल से निकलती है। जल घनत्व की दृष्टि से हिमाचल की सबसे बड़ी इस नदी को इरावती के नाम से भी जाना जाता है।

ब्यास (अरिजिकिया) सुप्रसिद्ध रोहतांग दर्रे से निकलती है। सतलुज जिसकी लम्बाई हिमाचल प्रदेश में लगभग 320 कि.मी. है मानसरोवर के समीप राक्स झील (तिब्बत) से निकल कर प्रदेश में शिपकी नामक स्थान में प्रवेश करती है। 

टोंस, पब्बर तथा गिरी जो यमुना की सहायक नदियां हैं, हिमाचल प्रदेश के पूर्वी छोर में बहती हैं जो जिला सिरमौर में लगभग 22 कि.मी. का रास्ता तय करती हैं।


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Content Writer

Jyoti

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