Dhumavati Jayanti: आज इस विधि से करें मां धूमावती की पूजा-अर्चना

2021-06-18T11:46:15.853

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार देवी पार्वती के कई रूप हैं, जिनमें से एक है धूमावती माता। आज 18 जून को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को धूमावती जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। कथाओं के मुताबिक इस दिन देवी धूमावती माता का धरती पर प्राक्ट्य हुआ था। शास्त्रों में इनके बारे में जो उल्लेख किया गया है उसके मुताबिक मां धूमावती का स्वरूप अत्यंत विकराल एवं उग्र है, जो प्रलयकाल में भी स्थित है। इनके बारे में प्रचलित मान्यता हैं कि जब प्रलय काल मे संपूर्ण ब्रह्राण्ड समाप्त हो जाता है, देवों के देव महादेव भी अंतर्ध्यान हो जाते हैं, चारों ओर केवल धुआं-धुआं ही रह जाता, उस समय में धूमावती अकेली अवस्थित रहती हैं। मां धूमावती स्वेत वस्त्र धारण करती है तथा कौवे की सवारी करती हैं। इनकी पूजा से कई अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होता है। आइए जानते हैं इनकी पूजन विधि व मंत्र के बारे में- 
 
शास्त्रों के अनुसार धूमावती माता का अवतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। मान्यताए प्रचलित हैं कि धूमावती माता की पूजा करने से रोग आदि से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय तथा विपत्तियों को नाश हो जाता है। इनके दर्शन मात्र से जीवन के सभी अनिष्ट समाप्त हो जाते हैं। परंतु ध्यान रहे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुहागिन स्त्रियों को धूमावती माता की पूजा नहीं करनी चाहिए।

पूजन विधि
इस दिन पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। 
फिर धूमावती माता के फोटो या चित्र पर जल, पुष्प, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप और नैवैद्य आदि चढ़ाएं। Expand धर्म/कुंडली टीवी
आखिर में मां धूमावती की कथा पढ़ कर, माता के मंत्रों का जाप करें।

माता धूमावती के मंत्र-
ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।

धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे।

सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:।

धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।
 


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Content Writer

Jyoti

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