धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में करें पूजा! कभी खाली नहीं होंगे धन के भंडार!

10/26/2021 3:05:25 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
हमारे शास्त्रों में और संस्कृति में धनतेरस का बहुत महत्व बताया गया है। कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस कहते हैं। यह त्योहार दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है। धनतेरस का त्योहार धन और समृद्धि का भी कारक है और शास्त्रों में वर्णित है कि धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, भगवान धनवंतरी और धन कुबेर की उपासना करने से घर में धन के भंडार कभी खाली नहीं होते हैं।  इस दिन नए बर्तन खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन बहुत से लोग भगवान धन्वंतरी के साथ-साथ मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा करते हैं। 

इस बार दीपावली से 2 दिन पहले 2 नवंबर दिन मंगलवार को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। मान्यता है कि भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था। भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। 

वैसे भी भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता रहा है। यह कहावत आज भी प्रचलित है कि 'पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया' इसलिए दीपावली में सबसे पहले धनतेरस को महत्व दिया जाता है। जो भारतीय संस्कृति के हिसाब से बिल्कुल अनुकूल है। 

धनतेरस के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार बर्तन, स्वर्ण, चांदी आदि सामान खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कहा जाता है कि इस दिन नई चीज घर में लाना शुभकारी होता है। कहते हैं कि इस दिन नए बर्तन खरीदने से 13 गुणा वृद्धि होती है  इसीलिए इस दिन लोग जमकर खरीददारी करते हैं और नए बर्तन घर में लाते हैं। इसके अलावा इस दिन चांदी खरीदना भी शुभ माना गया है। लिहाज़ा लोग इस दिन चांदी की लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति की खरीददारी भी करते हैं।  

धनतेरस तिथि और शुभ मुहूर्त-
धनतेरस  2 नवंबर  मंगलवार को है। इस दिन प्रदोष काल शाम 5 : 37 से रात 8: 11 बजे तक है। वहीं वृषभ काल शाम 6।18 से रात 8।14 तक रहेगा। ऐसे में धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त 2 नवम्बर की शाम 6।18 बजे से रात 8।11 बजे तक रहेगा।

धनतेरस पूजा विधि-
धनतेरस के दिन शाम को पूजा के समय घर की उत्तर तरफ धनवंतरी और कुबेर की प्रतिमा स्थापित करें। उनके सामने एक–एक दीपक जलाएं। घी का दीपक जलाना उत्तम होगा। अब धूप दीप से उनकी आरती करें और भगवान धनवंतरी को पीली मिठाई और कुबेर को सफेद मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें। इसके बाद "धनवंतरि स्तोत्र" का पाठ करें। अंत में आरती करें ।अब गलती की क्षमा मांगते हुए हाथ जोड़कर प्रणाम करें।

बहुत से लोग धनतेरस पर मृत्यु देवता यमराज के लिए मुख्य द्वार पर यम नाम का दीप  भी जलाते हैं। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी और धन कुबेर के साथ देवी मां लक्ष्मी की पूजा करना भी उत्तम माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से कभी भी घर में धन के भंडार खाली नहीं होते और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

गुरमीत बेदी 
gurmitbedi@gmail.com


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Jyoti

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