देवी लक्ष्मी के साथ-साथ ज़रूर करें उनके अर्धांग की पूजा, समाज में बढ़ेगा आपकी रुतबा

2020-09-25T11:32:47.42

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विशेष रूप से शुक्रवार के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। धार्मिक ग्रंथों में किए वर्णन के अनुसार देवी लक्ष्मी की उतपत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। तो वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार देवी लक्ष्मी को ऋषि भृगु की पुत्री भा कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार इनकी पूजा-अर्चना करने से धन-धान्य में तो वृद्धि होती ही है साथ ही साथ जातक के जीवन में सुख-समद्धि भी बढ़ती है। तो चलिए आज शुक्रवार के दिन जानते हैं कि इस दिन इन्हें प्रसन्न करने के लिए जातक को क्या-क्या करना चाहिए।

देवी लक्ष्मी सृष्टि के पालनहार भगान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, जिस कारण शुक्रवार के दिन केवल इनका नहीं बल्कि विधि वत तरीके सेे श्री हरि का भी पूजन करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्री बताते हैं कि शुक्रवार के दिन इन्हें यानि देवी लक्ष्मी को कमल का फूल तथा, इनके अर्धांग भगवान नारायण को पीले फूल अर्पित करने से जातक की सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 
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कहा जाता है शुक्रवार के दिन देवी लक्ष्मी को शुक्रवार के दिन उनकी प्रिय चीज़ों का भोग लगाना भी अत्यंत लाभदायक माना जाता है। मगर कुछ लोगों को इस बार में जानकारी नहीं होती कि इन्हें किन चीज़ों का भोग लगाना शुभ होता है। तो बता दें धार्मिक मान्याताओं के अनुसार इस देवी लक्ष्मी को हमेशा सात्विक भोजन का ही भोग लगाना चाहिए, ध्यान रहे इसमें कुछ मीठा ज़रूर शामिल करें। संभव हो तो इस दिन देवी लक्ष्मी को खीर, हलवे का भोग लगाकर गरीबों में बांटना चाहिए। 

जो लोग अपने घर में देवी लक्ष्मी की प्रतिमा रखते हैं या रखने के इच्छुक होते हैं उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि देवी लक्ष्मी की प्रतिमा के साथ-साथ घर के पूजा स्थल में श्रीयंत्र ज़रूर स्थापित करें और देवी अष्ट लक्ष्मी की प्रतिमा हमेशा गुलाबी रंग के आसन पर स्थापित करें। इसके अलावा इस दिन पूजा के थाल में गाय के घी के 8 दीपक प्रजवल्लित करके गुलाब के सुगंध वाली धूपबत्ती जलाकर मां को मावे की बर्फी का भोग अर्पित करें। पूजा में रखे गए 8 दीपकों को बाद में घर की आठ दिशाओं में रख देँं। 

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चूंकि माता लक्ष्मी को कमल गट्टे की माला अत्यंत प्रिय है, इसलिए कहा जाता है इस देवी के मंत्रों का उच्चारण करने से तथा इनसे तिजोरी में रखने से धन-धान्य में बढ़ोत्तरी होती। 

यहां जानें इनकी आराधना का मंत्र-

ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा। 

मां लक्ष्मी पूजन के समय श्रीयंत्र और अष्टलक्ष्मी की प्रतिमा पर अष्ट गंध से इनका तिलक कर कमल गट्टे की माला से उपरोक्त मंत्र का श्रद्धा से 108 बार जप करें।
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Jyoti

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