Indian Independence Day: गोरे असुरों को भगाने वाली रानी रासमणि की शौर्य गाथा को नमन

8/14/2019 10:06:45 AM

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एक रानी रासमणि थीं। यह वह रानी थीं, जिन्होंने दक्षिणेश्वर काली मंदिर की स्थापना की थी, जिसके पुजारी ठाकुर रामकृष्ण परमहंस बने, जिनका पूर्ववर्ती नाम गदाधर था। बात 1830 ईस्वी के आस-पास की है। रानी रासमणि जॉन बाजार के राजा राजचंद्र की दूसरी पत्नी थीं। राजा का महल 300 कमरों की 7 मंजिला इमारत थी। उस समय इस महल की निर्माण लागत 25 लाख रुपए थी। 
PunjabKesari, Dakshineswar Kali Temple By Rani Rasmani
रानी रासमणि एक स्वदेशी पसंद महिला थीं और बहुत बुद्धिमान भी थीं। उस समय कलकत्ता में अंग्रेजी शासन स्थापित था। जॉन बाजार के महल में एक दिन गोरे असुरों ने घुसकर हंगामा किया, तो रानी ने उस समय उनका मुकाबला करके उनको भगा दिया। रानी शुद्ध ग्रामीण पृष्ठभूमि से आई गरीब परिवार की कन्या थी, परंतु असुर दल के लिए साक्षात महाकाली साबित हुईं। उस समय बंगाल में गंगा में मछली पकडऩे वाले मछुआरों पर अंग्रेजों ने कर लगा दिया। उनकी सहायता को रानी आगे आईं और बहुत बुद्धिमानी से मछली पकडऩे की पूरी जगह को 10 हजार रुपए में अंग्रेज बहादुर से खरीद लिया। उसके बाद मछुआरों को बिना कर दिए मछली पकडऩे की छूट मिल गई। 


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कुछ समय बाद उन्होंने मछली पकडऩे की पूरी जगह की घेराबंदी करवा दी। अंग्रेज बहादुर की बोट स्टीमर रुक गए। इस पर अंग्रेज बहादुर ने रानी के साथ समझौता किया, 10 हजार रुपए वापस दिए और मछुआरों को बिना कर मछली पकडऩे की छूट मिली।

उस समय बंगाल में स्नान यात्रा का महत्व था। उसमें देवता के लिए चांदी का रथ बनाने का काम रानी के दामाद और मैनेजर मथुरा बाबू ने उस समय के कलकत्ता के प्रसिद्ध जौहरी हेमिल्टन को सवा लाख रुपए में दिया तो रानी का सवाल था कि क्या हमारे सारे हिंदुस्तानी जौहरी मर गए? वह सौदा निरस्त हुआ और वह रथ भारतीय कारीगरों ने बनाया। 
PunjabKesari, Dakshineswar Kali Temple By Rani Rasmani
आज जहां ईडन गार्डन है, उसके पास स्थित बाबू घाट में नवरात्र की नवपत्रिका को स्नान करवाया जाता था। उसमें ढोल-नगाड़े खूब बजते थे, वैसे बाबू घाट भी रानी रासमणि ने ही बनवाया था। इन ढोल-नगाड़ों की शिकायत अंग्रेज बहादुर को होने पर उन्होंने रानी की स्नान यात्रा पर 50 रुपए जुर्माना लगाया। रानी ने जुर्माना जमा करवाया और रातों-रात बाबू घाट से जॉन बाजार तक का पूरा इलाका बाड़ से घेर लिया। यह इलाका पूरा वैसे रानी की मलकियत का था, सो सरकारी विरोध कोई काम नहीं आया। आखिर सरकार झुकी और समझौता हुआ, लिखित माफीनामा लिखा गया और जुर्माने की रकम वापस मिली। इसी रानी ने काली मंदिर बनवाया।





 


Niyati Bhandari